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सूचना

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों द्वारा वर्तमान में किसानों एवं लघु उद्यमियों को 12.50 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध करवाये जा रहे हैं।

   
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भूमि बैंक उच्च शिक्षा ऋण योजना

राज्य की सहकारी भूमि विकास बैंक अपने सदस्यों को बच्चो को स्नातकोत्तर एवं तकनीकी, मेडिकल आदि निम्न प्रकार के कोर्सेज में अध्ययन कराने हेतु, इस योजनानतर्गत ऋण वितरण कर सकेंगी

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1- योजना का उद्धेश्य-

-राज्य की सहकारी भूमि विकास बैंक अपने सदस्यों को बच्चो को स्नातकोत्तर एवं तकनीकी, मेडिकल आदि निम्न प्रकार के कोर्सेज में  अध्ययन कराने हेतु, इस योजनानतर्गत ऋण वितरण कर सकेंगी

1- समस्त स्नातकोत्तर एवं डॉक्टरेट कोर्सेज

2- फर्नीचर क्रय पर होने वाला व्यय ।

3- राजकीय मान्यता प्राप्त प्रोफेशनल कोर्सेज जैसे- इंजीनियरिंग, मेडिकल, कृषि, वेटेनरी, लॉ, डेन्टल, फैशन तकनीकी, हॉस्पिटल मैनेजमेन्ट, आर्युवेद, होम्योपैथी, फिजियोथेरेपी, होटल मैनेजमेटं, कम्प्यूटर, मैनेजमेन्ट, फैशन/टेक्सटाईल   डिजाइनिंग कोर्सेज आदि। ।

4- उक्त कोर्सेज एवं कॉलेज/ संस्था राज्य/केन्द्र/यू-जी-सी/ए-आई-सी-टी-ई- अथवा केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा गठित संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त हो ।

 

2-ऋण की पात्रता

इस योजना में ऋण हेतु मुख्यत निम्न मदों को शामिल किया जा सकेग--

1- प्रार्थी भूमि विकास बैंक के कार्यक्षैत्र का निवासी हो एवं प्रत्याभूति स्वरूप प्रस्तुत भूमि /भवन / अचल सम्पत्ति भी प्राथमिक बैंक के कार्यक्षैत्र में हो ।

2- छात्र/छात्रा का स्कूल अथवा कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित हो।

3- प्रस्तावित शिक्षण संस्थान केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त हो तथा उसका राजकीय मान्यता प्रापत बोर्ड अथवा विश्वविद्यालय से एफीलियेशन हो ।

4- प्रार्थी की पर्याप्त ऋण क्षमता एवं ऋण चुकारे की क्षमता बनती हो ।

5- प्रार्थी (माता पिता अथवा अभिभावक) की आयु 55 वर्ष से अधिक न हो ।

 

नोट-- भवन निर्माण हेतु ऋण के मामले में यह आवश्यक होगा कि वह भूमि जिस पर निर्माण होना हो वह आवेदक के नाम हो । भूमि क्रय हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जावेगी ।

 

3- ऋण सीमा

योजनान्तर्गत अधिकतम 10.00 लाख रूपये तक अथवा प्रस्तावित खर्च की राशि का 80 प्रतिशत तक, जो भी कम हो, ऋण स्वीकृत किया जा सकता है । शेष राशि को मार्जिन मनी के रूप में माता-पिता को वहन करना होगा । मार्जिन मनी में प्राथमिक बैंक की हिस्सा पूंजी में विनियोग की गई राशि सम्मिलित है ।

 

 

4- पात्र खर्चे

योजनान्तर्गत निम्न मदो हेतु ऋण स्वीकृत किया जा सकता है--

1- स्कूल/कॉलेज को देय फीस

2- परीक्षा/लाईब्रेरी/प्रयोगशाला शुल्क

3- हॉस्टल हेतु निर्धारित शुल्क।

4- पुस्तकें/औजार/वर्दी

5- व्यक्तिगत कम्प्यूटर/लेपटॉप, आवश्यकतानुसार

6- कॉशन मनी/बिल्डिंग फण्ड/वापसी योग्य जमा/सिक्योरिटी डिपोजिट्‌स

 

व्यक्तिगत ट्‌यूशन/कोचिंग पात्र गतिविधि नहीं होगी । ये ऋण मियादी ऋण के रूप में लिया जायेगा जिसका निर्धारण संबंधित स्कूल अथवा कॉलेज द्वारा दिये गये अनुमान पत्र के आधार पर किया जायेगा । पुस्तको, उपकरणो, ड्रेस, हॉस्टल, मैस आदि की सुविधा शिक्षण संस्थान द्वारा नहीं दिये जाने पर ऋणी से इस संबंध में घोषण पत्र प्राप्त कर सम्भावित खर्च का पूर्ण विवरण प्राप्त किया जायेगा।

उक्त ऋण कोष की पूर्ण अवधि के लिए प्रतिवर्ष अनुमानित खर्चो के आधार पर स्वीकृत किये जायेंगे । द्धितीय वर्ष के लिए अनुमानित खर्चो के आधार पर ऋण स्वीकृत किया जा सकता है चाहे प्रथम वर्ष हेतु स्वीकृत ऋण की कुछ राशि का वितरण शेष रहा हो किन्तु ऋण चुकारे की क्षमता एवं प्रथम ऋण के चुकारे की स्थिति से बैंक संतुष्ट हो ।

 

5- ऋण वितरण

टर्मवार/ वर्षवार शुल्क सीधे स्क्लू/ संस्था / हॉस्टल को--

1- पुस्तकों / औजार / इन्स्ट्रूमेन्ट हेतु सीधे पुस्तक विक्रेता/दुकानदार को ऋणी द्वारा यदि स्वयं सामान क्रय कर लिया जाता है तो बिलो के आधार पर पुनर्भरण किया जा सकता है ।

2- आगामी वर्ष हेतु ऋण वितरण तभी किया जाय जबकि छात्र पूर्व वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया हो तथा अभिभावकों द्वारा सत्यापित प्रोग्रेस रिपोर्ट, मार्कशीट बैंक में प्रस्तुत कर दी हो ।

3- प्रवेश के समय यदि स्कूल/ संस्था द्वारा पूर्ण फीस का भुगतान चाहा गया हो तो इसका प्रमाण प्राप्त कर फीस हेतु ऋण वितरण किया जा सकता है ।

4-यदि बैंक संतुष्ट हो तो पुस्तकों आदि की खरीद पर हुए खर्च का प्रमाण प्राप्त कर पुर्नभरण किया जा सकता है ।

 

6- ऋण पात्रता का आंकलन

सरकार/बैंक/बीमा/अर्द्धसरकारी संगठन/सहकारी संस्थाओं में कार्यरत स्थाई / नियमित कर्मचारियों के केस में नियोक्ता से प्राप्त आय प्रमाण पत्र जिसमें समस्त कटौतियों का भी विवरण हो

1- प्रोफेशनल जैसे डौक्टर, इंजिनियर, सी-ए-, वकील आदि

2- गत दो वर्षो से आयकरदता व्यवसायी

3- कृषि भूमि से प्राप्त आय के आधार पर कृषक ।

4- व्यक्तिगत अथवा पति-पत्नि की संयुक्त आय के आधार पर भाई/बहिन अथवा पुत्र/पुत्री के लिए ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

 

उपरोक्त सभी केसेज में समस्त कटौतियों/देनदारियों एवं प्रस्तावित ऋण की किश्त के उपरान्त मासिक देनदारी कुल मासिक आय के 60 प्रतिशत से अधिक न हो

 

7- ऋण की अवधि एवं पुर्नभुगता

1- ऋण का भुगतान कोर्स पूर्ण होने के एक वर्ष पश्चात्‌ अथवा छात्र के सेवा में आने के 6 माह उपरान्त, जोभी पहले हो, प्रारम्भ होगा ।

2- ग्रेस अवधि(मोरिटोरियम पीरियड) में केवल ब्याज देय होगा।उक्त ग्रेस अवधि में ब्याज की छ:माही रूप से वसूली की जायेगी ।

3- ऋण की किश्तो का चुकारा प्रार्थी की सुविधानुसार मासिक/त्रैमासिक किश्तो में किया जा सकता है ।

4- ऋण का चुकारा कोर्स की आवश्यकता के अनुरूप अधिकतम 5 वर्ष की अवधि में किया जा सकता है । उक्त अवधि कोर्स समाप्त होने के उपरान्त उपरोक्त पैरा(i) के अनुसार निर्धारित की जाय ।

 

8- प्रत्याभूति

ऋण का चुकारा छात्र द्वारा ही किया जायेगा । किन्तु ऋण अवधिपार होने की दशा में ऋण के चुकारे की जिम्मेदारी उनके अभिभावक की होगी । ऋण प्रार्थना पत्र में छात्र एवं माता/पिता/अभिभावक के ऋण आवेदककर्ता की हैसियत से हस्ताक्षर होगें एवं उनसे तदनुसार ही समस्त पत्रादि प्राप्त किये जायेंगे । माता/पिता/अभिभावक से प्रत्याभूति निम्न प्रकार प्राप्त की जा सकती है:-

1- कृषि भूमि से प्राप्त आय के आधार पर स्वीकृत ऋणों के केस में उस क्षैत्र में सब रजिस्ट्रार से प्राप्त गत तीन वर्षो की प्रत्याभूतिस्वरूप प्रस्तावित भूमि की औसत विक्रय दर से प्राप्त मूल्य का अधिकतम 60 प्रतिशत तक ऋण स्वीकृत किया जा सकता है एवं/अथवा ।

2- प्रत्याभूतिस्वरूप राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र एवं / अथवा भूमि विकास बैंक में फिक्स डिपोजिट, स्वयं के नाम जारी जीवन बीमा पॉलिसी भी प्रस्तुत की जा सकती है । राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र एवं / अथवा भूमि विकास बैंक में फिक्स डिपोजिट, के खरीद मूल्य के 80 प्रतिशत तक तथा जीवन बीमा पॉलिसी के पेड-अप मूल्य के 80 प्रतिशत तक ऋण स्वीकृत किया जा सकता है।।

3- वेतनिक कर्मचारियों के केस में नियोक्ता से वेतन से ऋण की किश्तों से कटौती करने का अधिकार पत्र व नियोक्ता की सहमति प्राप्त की जाय ।

 

प्रत्याभूतिस्वरूप प्रस्तुत अचल सम्पत्ति को बैंक द्वारा साम्य बंधक रखा जाकर मूल पत्रादि पूर्ण ऋण चुकारे तक बैंक में लॉकर में सुरक्षित रखे जायं । उन्हें किसी भी स्थिति में पत्रावली में संलग्न नहीं किया जाय तथा मूल पत्रावली प्राप्त करने की ऋणी को रसीद दी जाय ।

 

9- आयु सीमा

-- रहन हेतु प्रस्तावित भूमि, पूर्व निर्मित भवन एवं प्रस्तावित स्थायी निर्माण कार्य के मूल्यांकन का 60 प्रतिशत तक ऋण क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है। ऋण क्षमता के ऑकलन में मशीनरी/ इक्यूपमेन्ट्‌स, पुस्तकें आदि चल सम्पत्ति को सम्मिलित नहीं किया जावें।

1- वेतनभोगी कर्मचारियों के केस में उनकी सेवानिवृति की तिथि को ध्यान में रखते हुए ऋण चुकारे की अवधि तय की जाय ।

2- व्यवसायियों एवं कृषि आय के आधार पर आधारित ऋणों के केस में ऋण प्राप्त की अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष होगी ।।

 

 

10- सदस्यता-- आवेदक को प्राथमिक बैंक का सदस्य बनाया जाय

 

11- हिस्सा राशि-- स्वीकृत ऋण राशि पर (वितरित किश्तों के आधार पर) ऋण के अनुपात में 5 प्रतिशत की दर से हिस्सा राशि में विनियोग करना होगा ।

 

12- प्रशासनिक शुल्क-

कुल स्वीकृत ऋण राशि पर 0-25 प्रतिशत की दर से प्रशासनिक शुल्क देय होगा ।

 

13- ब्याज दर-

बैंक द्वारा समय ≤ पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।--

 

14- डाक्यूमेन्टेशन

बैंक द्वारा समय पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।

1- प्रत्याभूतिस्वरूप भूमि के मूल पत्रादि ।

2- अकृषि उद्धेश्यों हेतु निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शपथ-पत्र ।

3- स्कूल/कॉलेज में प्रवेश हेतु जारी पत्र ।

4- अन्तिम परीक्षा की अंक तालिका एवं ट्रांसफर सर्टिफिकेट की सत्यापित प्रति।

5- कॉलेज को देय प्रवेश एवं अन्य शुल्क, हॉस्टल हेतु निर्धारित शुल्क, पुस्तकें, काशन मनी, सिक्यूरिटी डिपॉजिट आदि के संबंध में स्कूल/कॉलेज अथवा विक्रेता से अनुमान पत्र ।

6- निर्धारित संलग्न प्रपत्रों में शिक्षा ऋण हेतु एग्रीमेन्ट तथा जमानतदार का गारण्टी पत्र ऋण स्वीकृति उपरान्त प्राप्त किया जाय जो नोटेरी से प्रमाणित हो।

7- प्रार्थी से शपथ पत्र प्राप्त किया जाय कि उक्त उद्धेश्य हेतु किसी अन्य संस्था / राज्य सरकार आदि से ऋण / सहायता प्राप्त नहीं की जा रही है ।

 

15- अन्य निर्देश

निम्न निर्देश--

1- ऋणियों को एक पास बुक जारी की जायेगी जिसमें समय समय पर समस्त व्यवहारों की प्रविष्टियो की जायेंगी ।

2- एवं ब्याज की समस्त किश्तों के एडवान्स चैक प्राप्त किये जायं ।

3- बैंक ऋण से क्रय की गई वस्तुओं, जैसे कम्प्यूटर, लेपटॉप आदि का बैंक के पक्ष में हाईपोथिफिकेशन कराया जाय ।

4- बैंक ऋण से क्रय की गई वस्तुओं का बैंक एवं संबंधित संस्थाओं द्वारा निरीक्षण किया जा सकता है तथा स्कूल/संस्था में इस संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है । इस बारे में ऋण वितरण से पूर्व ऋणी से सहमति प्राप्त की जाय ।

5- उक्त ऋण प्राथमिक बैंक स्तर पर निर्धारित निर्देशो के अनुरूप स्वीकृत किये जायेंगें ।

6- ऋण स्वीकृति से पूर्व बैंक द्वारा संबंधित संस्था से फीस ढॉचे एवं अन्य खर्चा तथा कोष की अवधि के संबंध में जानकारी प्राप्त की जायेगी ।

7- डोनेशन हेतु ऋण स्वीकृत नहीं किया जायेगा ।

8- प्रत्येक सेमेस्टर / छमाही उपरान्त सम्बन्धित संस्था से छात्र की परफोरमेन्स एवं अंक तालिका प्राप्त की जायेगी ।

9- अवयस्क (उपदवत) के केस में ऋण स्वीकृति माता/पिता/अभिभावक के नाम जारी की जायेगी तथा छात्र के बालिग होने पर । (Acknoledgemnt of Dept and security) आवश्यक रूप से प्राप्त की जाय ।

10- प्राथमिक बैंक स्तर पर अन्य पत्रादि आवश्यकतानुसार प्राप्त किये जा सकते हैं।

 

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