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सूचना

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों द्वारा वर्तमान में किसानों एवं लघु उद्यमियों को 12.50 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध करवाये जा रहे हैं।

   
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स्वास्थ्य सेवा योजना

वर्तमान में ग्रामीण क्षैत्रों में या तो सेवाऐं उपलब्ध ही नहीं है और ग्रामीणों को सामान्य बीमारियों के इलाज हेतु सुदूर स्थानों पर  जाना पड़ता है अथवा उनको विशेषज्ञो की सेवाऐं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। अत: जिले में विभिन्न स्थानो पर योग्य चिकित्सकों की सेवाऐं उपलब्ध हों, तथा लोगो को चिकित्सकों से परामर्श करने, बीमारियों की जॉंच कराने, प्रसूति एवं गर्भवती महिलाओं की देखभाल, आपरेशन एवं भर्ती हेतु इसके लिए वहॉं अस्पताल/ क्लिनिक /नर्सिंग होम/डायग्नोस्टिक सेन्टर/मेटरनिटी होम आदि की स्थापना हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।

 

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1- योजना का उद्देश्य--

इस योजना का उद्धेश्य प्राथमिक बैंक के कार्यक्षैत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के क्रम में छोटे अस्पताल/ क्लिनिक /नर्सिंग होम/डायग्नोस्टिक सेन्टर/मेटरनिटी होम आदि की स्थापना हेतु ऋण उपलब्ध कराना है । वर्तमान में ग्रामीण क्षैत्रों में या तो सेवाऐं उपलब्ध ही नहीं है और ग्रामीणों को सामान्य बीमारियों के इलाज हेतु सुदूर स्थानों पर जाना पड़ता है अथवा उनको विशेषज्ञो की सेवाऐं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। अत: जिले में विभिन्न स्थानो पर योग्य चिकित्सकों की सेवाऐं उपलब्ध हों, तथा लोगो को चिकित्सकों से परामर्श करने, बीमारियों की जॉंच कराने, प्रसूति एवं गर्भवती महिलाओं की देखभाल, आपरेशन एवं भर्ती हेतु इसके लिए वहॉं अस्पताल/ क्लिनिक /नर्सिंग होम/डायग्नोस्टिक सेन्टर/मेटरनिटी होम आदि की स्थापना हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। साथ ही इससे क्षैत्र में योग्य व्यक्तियों को ऋण सुविधा के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे।

 

2- ऋण की पात्रता..

इस योजना में ऋण हेतु मुख्यत निम्न मदों को शामिल किया जा सकेग--

1. प्रवर्तक अस्पताल/ क्लिनिक /नर्सिंग होम/डायग्नोस्टिक सेन्टर/मेटरनिटी होम परियोजना संचालन करने की योग्यता रखते हो । उन्होंने राजकीय मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से वॉंछित योग्यता प्राप्त की हो तथा जो एलोपेथी मेडिसन्स में राजकीय मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर हों।

2. फर्नीचर क्रय पर होने वाला व्यय ।

3. प्रवर्तक या समिति के पास स्वयं का उपयुक्त भूखण्ड हो जहा अस्पताल/क्लिनिक या मेटरनिटी होम के लिए आवश्यकतानुसार भवन बनाया जा सके ।

4. प्रवर्तक या तो स्वयं राज्य / केन्द्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय अथवा अन्य संस्था से प्रशिक्षित विशेषज्ञ हों अथवा मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से प्राप्त डाक्टर की डिग्री धारक या विशेषज्ञ को नियोजित करे ।

5. प्रस्तावित अस्पताल/ क्लिनिक /मेटरनिटी होम आदि का स्कोप हो अर्थात जहॉं स्वास्थ्य सेवाऐं- अस्पताल आदि या तो नहीं हो या अपर्याप्त हो और स्थानीय तथा आस-पास के क्षैत्र के लिए अच्छे अस्पताल/ क्लिनिक /मेटरनिटी होम की आवश्यकता हो ।

6. परियोजना के लिए आवश्यक राजकीय अनुमति/लाइसेंस आदि मिल गया हो ।

7. प्रस्तावित कार्य एवं निर्माण हेतु नगरपालिका / स्थानीय निकाय की अनुमति प्राप्त हो।

8. आरम्भिक व्यय राशि ।

9. प्रस्तावित स्थल पर पानी एवं बिजली की सुविधा उपलब्ध हो ।

10. परियोजना में चिकित्सा विशेषज्ञो, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी स्टाफ एवं अन्य आवश्यक कर्मचारियों के संबंध में पूर्ण प्रावधान किया गया हो । साथ ही आवश्यक निर्माण, मशीनरी, लेबोरेट्री इक्यूपमेन्ट आदि का भी पूर्ण प्रावधान हो।

11. साधारणत: प्रवर्तक को प्रस्तावित कार्य का कम से कम 5 वर्ष का पूर्व अनुभव एवं क्षमता हो।

 

नोट-- भवन निर्माण हेतु ऋण के मामले में यह आवश्यक होगा कि वह भूमि जिस पर निर्माण होना हो वह आवेदक के नाम हो । भूमि क्रय हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जावेगी ।

 

3- परियोजना लागत--

योजनान्तर्गत अस्पताल/ क्लिनिक /मेटरनिटी होम आदि की स्थापना की परियोजना में लागत के रूप में निम्न व्ययो को शमिल किया जा सकेगा--

1. अस्पताल/ क्लिनिक /मेटरनिटी होम आदि के लिए आवश्यक भवन का निर्माण व्यय

2. इन्डोर होस्पीटल/मेटरनिटी होम के केसेज में आपरेशन थियेटर, नर्सिंग रूम, बच्चो हेतु डोरमेट्री बेडस,मेटेसेज,पिलो,बेडशीटस अटेन्डेन्ट के लिए बेंच आदि का व्यय ।

3. पऑपरेशन थियेटर/लेबर रूम, लेबारेट्री, वार्ड, आउटडोर, रिसेप्शन आदि हेतु आवश्यक फर्नीचर व साजो सामान ।

4. आउट डोर व आने वाले बीमार व अटेडेन्टस के बेठने हेतु फर्नीचर का व्यय

5. अस्पताल की आवश्यक मशीने/इक्वीपमेंट्‌स का व्यय ।

6. प्रिलिमिनरी व प्री आपरेटिव व्यय की राशि ।

7. विद्युत एवं पानी की व्यवस्था से संबंधित समस्त खर्चे ।

 

4- मूलभूत सुविधाए--

अस्पताल/ क्लिनिक /मेटरनिटी होम आदि की परियोजना के संचालन हेतु निम्न मूलभूत सुविधाओं को होना सुनिश्चित किया जाना चाहिए:

1. प्रशिक्षित डाक्टर/लेडी डाक्टर/नर्सेज/वार्ड ब्याय/स्वीपर की उपलब्धता।

2. परियोजना स्थल संचार सुविधाओं से जुड़ा हो ।

3. पानी व बिजली की उपलब्धि सुनिश्चित हो ।

4. आवश्यकता होने पर अन्य विशेषज्ञो की सेवाऐं भी उपलब्ध हो सके ।

5. अस्पताल/ क्लिनिक /मेटरनिटी होम के आस-पास खुला स्थान हो ताकि बीमान को खुली हवा भी मिल सके व प्रदूषण प्रभावित न हो ।

6. इकाई राज्य सरकार/ सक्षम आथोरिटी द्वारा परियोजना के स्थापन हेतु निर्धारित आवश्यक नार्मस्‌ पूर्ण करती हो ।

 

5- परियोजना रिपोर्ट--

परियोजना रिपोर्ट में संस्थान की क्षेत्र के अनुसार उपयोगिता, प्रर्वतकों की संचालन क्षमता, प्रयोगशाला, बाह्‌य रोगी एवं इन्डोर वार्ड सुविधाऐं एवं अन्य आधार भूत सुविधाओं की व्यवस्था, प्रारम्भिक एवं परियोजना पूर्व खर्च, मदवार व्यय, प्रोफिटेविलिटी स्टेटमेन्ट, कैश-फलों स्टेटमेन्ट, कार्यशील पूंजी की गणना एवं आर्थिक संगणनायें जैसे ब्रेक इविन विन्दु, डेब्ट सर्विस कवरेज रेशो आदि का समावेश हो।

 

6- परियोजना लागत व ऋण राशि--

प्राथमिक भूमि विकास बैंक ऐसी परियोजना को ही ऋण हेतु स्वीकार करेगा जिनकी कुल परियोजना लागत 50.00 लाख से अधिक नहीं होगी। उद्यमी व्यक्ति/ समिति/ ट्रस्ट का न्यूनतम्‌ अंशदान 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक अवश्य होगा परन्तु बैंक ऋण प्राथमिक बैंक हेतु शीर्ष बैंक द्वारा निर्धारित नार्मस्‌ के अनुसार ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

 

7- ऋण की अवधि--

ऋण की अवधि का निर्धारण परियोजना की सम्भावित बचत के आधार पर होगा परन्तु योजनान्तर्गत ऋण के चुकारे की अवधि न्यूनतम्‌ 2 वर्ष व अधिकतम्‌ 10 वर्ष होगी जिसमें अधिकतम्‌ 18 माह की ग्रेस अवधि (मोरेटोरियम पीरियड) भी शामिल होगा। ऋण का भुगतान परियोजना के अनुसार मासिक/त्रैमासिक/अर्द्धवार्षिक किश्तों में किया जा सकेगा । ग्रेस अवधि का ऑकलन भी परियोजना की आवश्यकता के आधार पर किया जायेगा तथा ग्रेस अवधि(मोरेटोरियम पीरियड) में केवल ब्याज देय होगा

 

8- ऋण की सिक्यूरिटी--

प्रत्याभूति स्वरुप आवेदक/आवेदकों के नाम स्वयं के स्वामित्व की भारमुक्त कृषि/ आवासीय/ वाणिज्यिक भूमि/ भवन निम्न प्रकार स्वीकार किये जा सकते है :- क्र-सं- विवरण मूल्यांकन की विधि

1- कृषि /आवासीय भूमि/ वाणिज्यिक भूमि गत तीन वर्षो की औसत विक्रय दर के आधार पर ।

2- पूर्व निर्मित भवन एवं / अथवा प्रस्तावित भवन मूल्यांकन कनिष्ठ/सहायक अभियन्ता अथवा राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित इंजीनियर/वेल्यूअर द्वारा ।

3- चल सम्पत्ति जैसे आवेदक के नाम एन-एस-सी-, किसान विकास पत्र एवं/अथवा प्राथमिक भूमि विकास बैंक में सावधि जमा फेस वेल्यू पर अधिकतम 80 प्रतिशत तक ।

ऋण से सृजित समस्त चल एवं अचल सम्पत्ति बैंक के पक्ष में बन्धक/ हाइपोथिकेट (आवश्यकतानुसार) कराई जावेगी।

 

9- ऋण क्षमता का ऑकलन--

रहन हेतु प्रस्तावित भूमि, पूर्व निर्मित भवन एवं प्रस्तावित स्थायी निर्माण कार्य के मूल्यांकन का 60 प्रतिशत तक ऋण क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है। ऋण क्षमता के ऑकलन में मशीनरी/ इक्यूपमेन्ट्‌स, पुस्तकें आदि चल सम्पत्ति को सम्मिलित नहीं किया जावें।

 

10- ऋण चुकारे की क्षमता--

प्रस्तावित परियोजना के एप्रेजल उपरान्त सम्भावित शुद्ध आय का 75 प्रतिशत तक ऋण चुकारे की क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है ।

 

11- ऋण स्वीकृति प्रक्रिया--

ऋण प्रार्थना पत्र एवं परियोजना रिपोर्ट प्राप्त होने पर सम्बन्धित बैंक अधिकारी उसकी विस्तृत जॉच करेंगे तथा सुनिश्चित करेंगे कि प्रस्तुत परियोजना रिपोर्ट एवं प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि/भवन आदि नियमानुसार है । तत्पश्चात्‌ अकृषि उद्येश्यों हेतु शीर्ष बैंक द्वारा पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शाखा अधिकारियों द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जावेगी तथा शाखा सचिव प्राथमिक बैंक के प्रधान कार्यालय को अग्रिम कार्यवाही हेतु पत्रावली प्रेषित करेंगे। प्रत्येक केस में प्रत्याभूति के सम्बन्ध में प्राथमिक बैंक द्वारा विधि सलाहकार की राय ली जावेगी । प्राथमिक बैंक के प्रधान कार्यालय स्तर पर पत्रावली की पुन: जॉच कर पत्रावली स्वीकृति योग्य होने पर अकृषि उद्येश्यो हेतु गठित एप्रेजल कमेटी द्वारा इकाई का एप्रेजल कर स्वीकृति सम्बन्धी अग्रिम कार्यवाही की जायेगी ।

ऋण स्वीकृत होने पर बैंक द्वारा स्वीकृति पत्र जारी किया जायेगा जिसमें ऋण स्वीकृति की समस्त शर्तो का उल्लेख होगा । स्वीकृति पत्र में ऋण राशि मय मदवार विगत, किश्तों के वितरण की प्रक्रिया, ब्याज दर, ऋण चुकाने की अवधि, अवधिपार राशि पर दण्डनीय ब्याज की दर, दुरुपयोग होने पर एकमुश्त वसूली की शर्त, बीमा की अनिवार्यता आदि का उल्लेख आवश्यक रुप से किया जावेगा तथा इसकी प्रार्थियों से लिखित में सहमति प्राप्त की जावेगी।

पत्रावली में आक्षेप पाये जाने पर प्रार्थियों को प्राथमिक बैंक द्वारा पत्र द्वारा अवगत कराया जावेगा ।

 

12- प्रशासनिक शुल्क--

योजनान्तर्गत स्वीकृत ऋण राशि पर 0-25-प्रतिशत की दर से प्रशासनिक शुल्क देय होगा ।

 

13- हिस्सा राशि--

स्वीकृत ऋण राशि पर प्राथमिक बैंक द्वारा निम्न प्रकार हिस्सा राशि प्राप्त की जावेगी--

ऋण राशि ऋण राशि पर हिस्सा राशि

रुपये 2-00 लाख तक 5 प्रतिशत

रुपये 2-00 लाख से अधिक पर 3 प्रतिशत

 

14- ब्याज दर--

बैंक द्वारा समय पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।

 

15- ऋण राशि का निर्गमन--

विभिन्न व्ययों के लिये स्वीकृत ऋण राशि निम्न प्रकार जारी की जायेगी--

(क) भवन निर्माण हेतु: तीन किश्तों में । प्लिन्थ लेवल तक निर्माण उपरान्त प्रथम किश्त, छत लेवल तक निर्माण पश्चात्‌ द्वितीय किश्त एवं फिनिशिंग स्तर पर तृतीय किश्त

(ख) वाहन क्रय हेतु: सीधा अधिकृत वाहन विक्रेता को अधिकार पत्र के आधार पर रेखांकित चैक द्वारा।

(ग)फर्नीचर, इक्विपमेन्ट्‌स, पुस्तकें, प्रयोगशाला उपकरण आदि सीधे सप्लायर को रेखांकित चैक द्वारा ।

(घ) अन्य व्ययों हेतु आवश्यकता के अनुसार ।

(ड-) कार्यशील पूंजी आवश्यकता के अनुसार ।

 

ऋण राशि जारी करते समय हर स्तर पर उद्यमी के अंशदान का विनियोग एवं ऋण राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जावें । अनुपयोग/दुरुपयोग पाये जाने पर बैंक को अधिकार होगा कि ऋण की अगली किश्त जारी नहीं की जाये एवं वितरित ऋण राशि की एकमुश्त वसूली की कार्यवाही की जावें ।

 

16- बीमा

विभिन्न व्ययों के लिये स्वीकृत ऋण राशि निम्न प्रकार जारी की जायेगी--

बैंक ऋण से स्थापित इकाई का कम्प्रीहेन्सिव बीमा करवाया जावे तथा इसकी सत्यापित प्रति पत्रावली में संलग्न किया जावे। बीमें का प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराया जावें तथा यदि ऋणी द्वारा नवीनीकरण नहीं कराया जावे तो बैंक द्वारा स्वयं नवीनीकरण कराकर प्रीमियम की राशि ऋण खातें में ऋणी के नाम डेबिट कर दी जावें। इस सम्बन्ध में ऋण वितरण से पूर्व प्रार्थियों से सहमति प्राप्त की जावें । बीमा पॉलिसी में बैंक का नाम वित्तदाता की हैसियत से दर्ज कराया जावें तथा उसे बैंक के नाम डिस्चार्ज कराया जावें ।

 

17- आवश्यक अभिलेख--

निर्धारित ऋण प्रार्थना पत्र के साथ मुख्यत: निम्न अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे--

1- प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि/भवन आदि के मूल पत्रादि ।

2- कृषि भूमि के केस में अन्तिम जमाबन्दी, खसरा गिरदावरी एवं आवश्यकतानुसार नामान्तरकरण की प्रति । पटवारी द्वारा प्रमाणित भूमि का नक्शा ।

3- रहन हेतु प्रस्तावित भूमि के मूल्यांकन के सम्बन्ध में उस क्षेत्र की समान किस्त की भूमि की बिक्री के गत तीन वर्षो के ऑकडे जो क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार से प्राप्त किये जावें ।

4- परियोजना रिपोर्ट दो प्रतियों मेंं। परियोजना रिपोर्ट में प्रस्तावित मशीनरी, फर्नीचर एवं अन्य प्रस्तावित खरीददारियों के सम्बन्ध में अधिकृत डीलर/ विक्रेताओं के कोटेशन ।

5- प्रस्तावित भवन एवं अन्य निर्माण कार्य के ऐस्टीमेट तथा स्थानीय निकाय से संस्था स्थापित करने एवं भवन निर्माण की अनुमति ।

6- समिति अथवा ट्रस्ट के पंजीकरण प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति । संस्था के संविधान के अन्तर्गत उक्त ऋण प्राप्त करने हेतु नामांकित अधिकारियों हेतु पारित प्रस्ताव की सत्यापित प्रति ।

7- केन्द्र/ राज्य सरकार/ बोर्ड/ विश्वविद्यालय अथवा अन्य सक्षम विभाग/ संस्था द्वारा मान्यता/ एफीलेशन के सम्बन्ध में पत्र की सत्यापित प्रति ।

8- संस्थान स्थल के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने हेतु सक्षम अधिकारी से प्राप्त स्वीकृति की प्रमाणित प्रति ।

9- संस्था के पदाधिकारियों एवं/अथवा मुख्य कार्यकारी को शैक्षणिक संस्था के संचालन के सम्बन्ध में अनुभव प्रमाण पत्र ।

10- अकृषि उद्येश्यों हेतु प्रार्थियों एवं जमानतदारों से पूर्व निर्धारित प्रपत्रों में शपथ पत्र प्राप्त किये जाये।

11- अकृषि उद्देश्यों हेतु पूर्व निर्धारित समस्त अन्य पत्रादि/ अभिलेख

 

18- पर्यवेक्षण एवं मोनेटरिंग --

1- प्राथमिक बैंक के अधिकारी ऋण वितरण के पश्चात्‌ वाहन का छ: माह में कम से कम एक बार निरीक्षण आवश्यक रुप से करें तथा सुनिश्चित करें कि वितरित ऋण का सदुपयोग किया गया है ।

2- राज्य सरकार, प्राथमिक बैंक, राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक, नाबार्ड के प्रतिनिधि ण से प्राप्त वाहन का समय समय पर निरीक्षण कर सकेंगे।

3- प्राथमिक बैंक शीर्ष बैंक द्वारा इस योजनान्तर्गत जारी लक्ष्यों के अनुरूप ऋण वितरण करेंगे।

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