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सूचना

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों द्वारा वर्तमान में किसानों एवं लघु उद्यमियों को 12.50 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध करवाये जा रहे हैं।

   
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प्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण विकास कार्यो का बढ़ावा देने, बेरोजगारी दूर करने, महिलाओं को विकास में भागीदार बनाने, उद्योग धन्धों को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालीन सहकारी साख के माध्यम से राजस्थान राज्य सहकारी

 

 

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1- प्राथमिक भूमि विकास बैंक हेतु पात्रता --राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के ऋण क्षमता के मानदण्डों के अन्तर्गत राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्राथमिक भूमि विकास बैंक ऋण वितरण करेंगे ।

 

2- ऋण हेतु पात्रता

निम्न शर्तें पूर्ण करने वाले आवेदकों को आवास योजनानन्तर्गत ऋण उपलब्ध कराया जायेगा:-

अ) प्रार्थी के नाम से स्वयं के स्वामित्व का भूखण्ड/निर्मित भवन हों । पूर्व निर्मित भवन के क्रय हेतु आवासन मण्डल/नगर पालिका/नगर निगम, अन्य संस्था अथवा व्यक्ति से किये गये इकरारनामें/आवंटन पत्र की प्रति के आधार पर ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

ब) प्राथमिक भूमि विकास बैंक के कार्यक्षेत्र में आवास निर्माण/मरम्मत/खरीदने हेतु ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

स) प्रार्थी के पास पर्याप्त प्रतिभूति होनी चाहिये (चल - अचल सम्पत्ति) ।

द) प्रार्थी को स्वयं के आवास हेतु भवन की आवश्यकता हो । प्रस्तावित भवन की न्यनूनतम आयु 30 वर्ष हो ।

 

3- उद्देश्य

नवीन भवन निर्माण, आवासन मण्डल/संस्था/किसी व्यक्ति से भवन क्रय करने हेतु अथवा वर्तमान भवन की मरम्मत/ पुनरुत्थान/ अतिरिक्त निर्माण कार्य हेतु ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

 

4- भवन के निर्माण/क्रय हेतु आवश्यक अभिलेख

(अ) भूखण्ड/निर्मित भवन के स्वामित्व संबंधित आवश्यक मूल दस्तावेज (आवंटन पत्र, साइट प्लान, लीज डीड आदि) ।

(ब) पंचायत/ स्थानीय निकाय से आवश्यक अनुमति।

स) भूखण्ड/निर्मित भवन के संबंध में सब रजिस्ट्रार कार्यालय से गत 12 वर्षों का भार प्रमाणपत्र ।

(द) सिविल इंजिनियर/ वास्तुविद द्वारा निरूपित भवन निर्माण की अनुमानित लागत एवं नक्शे की प्रति।

(य) आवश्यक होने पर कृषि भूमि को आवासीय भूमि में रूपान्तरण संबंधित आदेश ।

(र) वैतनिक कर्मचारियों के मामलों में गत माह का वेतन प्रमाण पत्र, फार्म नं- 16(गत वर्ष का) तथा राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 की धारा 41 के अन्तर्गत वेतन से ऋण कटौती करने का अधिकार पत्र व नियोक्ता की सहमति/समस्त किस्तो के अग्रिम चैक्स ।

(ल) आवासन मण्ड़ल/नगरपालिका/नगर विकास न्यास/निगम/अन्य संस्था/व्यक्ति से प्राप्त आवंटन पत्र अथवा इकरारनामा ।

(व) प्रारम्भिक भुगतानों की मूल रसीदें एवं भार दर्ज कराने के सम्बन्ध में ना-आपत्ति प्रमाण पत्र ।

(ग) लीज डीड ।

(घ) आवास सम्बन्धी प्रमाण पत्र(राशन कार्ड/फोटो परिचय पत्र/बिजली या पानी का बिल/पेन कार्ड/पासपोर्ट की प्रति) ।

 

5- भवन का अनुमानित मूल्य :

(अ) भवन के अनुमानित मूल्य के आंकलन में रजिस्ट्रेशन शुल्क, विधिक शुल्क, बीमे की किश्त, विद्युतीकरण, प्लम्बरींग, वर्षा जल संग्रहण संरचना, सेनिटेशन आदि को सम्मिलित करके किया जा सकता है।

(ब) भवन निर्माण की अनुमानित लागत का अनुमान पत्र राजकीय सहायक/कनिष्ठ अभियंता/वास्तुविद्/मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्त्ता से प्राप्त किया जावेगा ।

(स) आवास इकाई की लागत 20-00 लाख से अधिक नहीं होगी।

(द) मरम्मत/पुनरूद्धार/वर्षा जल संग्रहण संरचना/सेनिटेशन की अधिकतम लागत 7-50 लाख रू0 होगी।

 

6- ऋण सीमा --

अ) प्रस्तावित निर्माण की लागत का अधिकतम 75 प्रतिशत अथवा ऋण क्षमता/ ऋण चुकाने की क्षमता के आधार पर ऑकलित ऋण क्षमता में जो भी कम हो तक ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा।

ब) नवीन भवन/अतिरिक्त निर्माण कार्य हेतु अधिकतम 15-00 लाख रुपये तक एवं मरम्मत/पुर्ननिर्माण/अपग्रेडेशन हेतु अधिकतम 5-00 लाख रुपये तक ऋण स्वीकृत किया जा सकता है । नवीन भवन/अतिरिक्त निर्माण कार्य हेतु 10.00 लाख रू तथा मरम्मत/पुर्ननिर्माण/अपग्रेडेशन हेतु अधिकतम 3-00 लाख रुपये तक के ऋण प्राथमिक बैंक स्तर पर स्वीकृत किये जाते है तथा इससे अधिक के ऋण राज्य भूमि विकास बैंक स्तर पर स्वीकृत किये जाते है।-

 

7- प्रत्याभूति

आवास ऋण प्रथमत: भूखण्ड(जिस पर आवास निर्माण किया जाना है / निर्मित मकान अथवा क्रय किये जा रहे मकान की प्रत्याभूति पर उपलब्ध कराये जायेंगे। ऋण की सुरक्षा हेतु आवश्यकता होने पर निम्न अतिरिक्त/वैकल्पिक प्रत्याभूति भी प्राप्त की जा सकती है

1- कृषि भूमि ।

2- आवासीय भूखण्ड ।

3- किसान विकास पत्र/राष्ट्रीय बचत पत्र ।

4- भूमि विकास बैंकों में सावधि जमा ।

किसान विकास पत्र/राष्ट्रीय बचत पत्र/ भूमि विकास बैंकों में सावधि जमा को बैंक के पक्ष में नामॉकित करवाया जावेगा ।

 

8- ऋण क्षमता का ऑकलन

अ)प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत कृषि भूमि / आवासीय भूखण्ड का मूल्य उस क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार से प्राप्त गत तीन वर्षो की औसत विक्रय दर के आधार पर किया जावेगा । उपरोक्त प्रकार प्राप्त भूमि के मूल्य एवं प्रस्तावित भवन की लागत का अधिकतम 60 प्रतिशत तक ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

ब) किसान विकास पत्र/राष्ट्रीय बचत पत्र/भूमि विकास बैंकों में सावधि जमा के खरीद मूल्य के 80 प्रतिशत तक की राशि को ऋण क्षमता के ऑकलन में सम्मिलित किया जा सकता है ।

 

9- ऋण भुगतान क्षमता

अ) कृषि भूमि से प्राप्त आय का ऑकलन शीर्ष बैंक द्वारा जारी जिलेवार मापदण्ड़ों अथवा प्रार्थी द्वारा वास्तव में ली जा रही पैदावार के आधार पर किया जायेगा ।

ब) कृषि से सम्बन्धित अन्य व्यवसाय अथवा उद्योग से प्राप्त नियमित आय को भी प्रार्थी की कुल आय में सम्मिलित किया जा सकता है । उक्त आय को सुनिश्चित किया जावे ।

स) व्यवसाय से प्राप्त आय का ऑकलन गत तीन वर्षो के आयकर निर्धारण के आधार पर किया जावे ।

द) वैतनिक कर्मचारियों के केस मेें समस्त कटौतियों के पश्चात्‌ प्राप्त शुद्ध वेतन को प्रार्थी की कुल आय में सम्मिलित किया जायेगा ।

उपरोक्त प्रकार प्राप्त कुल आय का अधिकतम 35 प्रतिशत तक प्रार्थी की ऋण चुकाने की क्षमता मानी जायेगी। ऋण देने से पूर्व ऋण आवश्यकता एवं ऋण की चुकोती क्षमता का वास्तविक ऑकलन अत्यन्त आवश्यक है।

10- ऋण भुगतान की प्रक्रिया/उपयोगिता की जांच

अ) यदि ऋणी सदस्य बना बनाया नवीन भवन क्रय करना चाहता है तो विक्रेता को एकमुष्त ऋण का भुगतान रजिस्ट्रेषन के समय सब रजिस्ट्रार कार्यालय में रेखांकित चैक द्वारा किया जायेगा।

ब) नवीन भवन निर्माण हेतु स्वीकृत ऋण का भुगतान निम्न प्रकार किया जायेगा :- ऋण का भुगतान तीन किष्तों में 30:40:30 के अनुपात में किया जायेगा।

• प्रथम किष्त का ऋण वितरण ऋणी सदस्य द्वारा प्लेन्थ स्तर तक निर्माण स्वयं के स्त्रोतों से कराने एवं उपयोगिता की जांच के पष्चात किया जायेगा।

• ऋण की प्रथम किष्त से छत से पूर्व तक के कार्यो को पूर्ण कराया जायेगा। ऋणी द्वारा प्रथम किष्त के उपयोग की सूचना बैंक को दी जायेगी तथा बैंक द्वारा प्रथम किष्त के उपयोगिता की जांच के पष्चात द्वितीय किष्त (40 प्रतिषत) का भुगतान किया जायेगा। ऋण की द्वितीय किष्त से छत, दरवाजे, खिडकियां आदि का कार्य करवाया जायेगा।

• द्वितीय किष्त से उपरोक्तानुसार कार्य हो जाने पर ऋणी द्वारा द्वितीय किष्त के उपयोग की सूचना बैंक को दी जायेगी । द्वितीय किष्त की उपयोगिता की जांच के पष्चात तृतीय किष्त (30 प्रतिषत) का भुगतान किया जायेगा।

• तृतीय किष्त से दीवारों तथा फर्स का प्लास्टर, बिजली, पानी सेनेटरी, फिनीषिंग आदि कार्य कराये जायेगें।

स) ऋणी को प्रथम किष्त दिये जाने की तिथि से एक वर्ष के अन्दर भवन निर्माण कार्य पूर्ण कराना अनिवार्य है।

द) ऋणी को प्रथम किष्त दिये जाने की तिथि से नो माह के अन्दर तृतीय किष्त प्राप्त करना अनिवार्य है।

य) ऋणी को अन्तिम किष्त दिये जाने के तीन माह के अन्दर भवन निर्माण का कार्य पूर्ण कराना अनिवार्य है।

र) अन्तिम ऋण उपयोगिता की जांच कर सत्यापन प्रमाण पत्र पत्रावली में रखा जाये।

 

11- ऋण की अवधि एवं ऋण चुकारे की प्रक्रिया

अ) नवीन भवन हेतु वितरित ऋण के चुकाने की अधिकतम अवधि 15 वर्ष होगी जिसमें अधिकतम 18 माह की ग्रेस अवधि सम्मिलित है ।

ब) भवन मरम्मत/पुर्ननिर्माण/अपग्रेडेशन हेतु ऋण के चुकारे की अधिकतम अवधि 5 वर्ष होगी। इसमे ग्रेस अवधि देय नहीं होगी।

स) केवल कृषि भूमि के आधार पर वितरित ऋणों की वसूली मासिक/त्रैमासिक/अर्द्धवार्षिक किश्तों में भी की जा सकेगी । अन्य केसेज में ऋण की वसूली मासिक किश्तों में की जावेगी । ग्रेस अवधि में केवल ब्याज ही वसूल किया जावेगा।

द) किश्तों का निर्धारण साम्य प्रणाली (इक्वेटेड इन्स्टालमेन्ट) के आधार पर किया जावेगा ।

 

12- जमानत

आवासीय भवन एवं भूखण्ड़ की प्रत्याभूति के आधार पर स्वीकृत ऋणों में दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों की जमानत प्राप्त की जावेगी। जमानतदारों द्वारा निर्धारित प्रपत्र में शपथ पत्र एवं अन्य आवश्यक पत्रादि प्रस्तुत करने होंगे तथा उनके स्वयं के नाम की अचल सम्पत्ति के स्वामित्व सम्बन्धित दस्तावेजों की सत्यापित प्रतिलिपि बैंक में प्रस्तुत करनी होगी ।

 

13- ब्याज दर

बैंक द्वारा समय≤ पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।

 

14- अन्य

(1) संयुक्त ऋण के केस में दो व्यक्तियों तक ही आवास ऋण संयुक्त रुप से स्वीकृत किया जा सकता है तथा वे निकट के रिश्तेदार हों जिनके द्वारा भवन का संयुक्त रुप से आवासीय उपयोग सुनिश्चित किया जावें ।

(2) राज्य सरकार/बैंक/बीमा/अर्द्धसरकारी संगठन/सहकारी संस्थाओं एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यवसायिक संगठनों में कार्यरत स्थाई/नियमित वैतनिक कर्मचारियों एवं गत तीन वर्षो से आयकरदाता व्यवसायियों को को ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

(3) वैतनिक कर्मचारियों के केस में ऋण की अवधि उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि तक सीमित रखी जावें ।

(4) पति एवं पत्नि के संयुक्त ऋण के केस में उनकी नियमित वैतनिक शुद्ध आय को उनके ऋण चुकारे की क्षमता के ऑकलन में जोड़ा जा सकता है

(5) बैंक ऋण से क्रय/निर्मित सम्पत्ति बैंक के पक्ष में साधारण बन्धक के रुप में रहेगी एवं बैंक का उस सम्पत्ति पर प्रथम भार होगा ।

(6) प्रत्येक केस में प्राथमिक बैंक द्वारा प्रत्याभूति एवं भूखण्ड के बारें में विधि सलाहकार की राय प्राप्त की जावे ।

 

15- बीमा

बैंक के ऋण से बनाये गये भवन/क्रय किये गये भवन का ऋणी एवं बैंक के संयुक्त नाम से बीमा कराया जायेगा । बीमें की मूल प्रति बैंक में ऋणी सदस्य की पत्रावली में रखी जावेगी जिसका नवीनीकरण पूर्ण ऋण के चुकारे तक प्रत्येक वर्ष ऋणी द्वारा कराया जायेगा । बीमा राशि लाभार्थी द्वारा वहन की जायेगी । यदि ऋणी द्वारा समय पर बीमें का नवीनीकरण नहीं कराया जाता है तो बैंक द्वारा नवीनीकरण कराकर प्रार्थी के खाते में प्रीमियम की राशि डेबिट की जाकर ऋणी को सूचित किया जावेगा ।

 

16- रजिस्ट्री बैंक ऋण से निर्मित भवन का मूल पट्‌टा/आवश्यक अभिलेख एवं बैंक ऋण से क्रय किये गये भवन के मूल दस्तावेज तथा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जारी की गई रसीद पूर्ण ऋण के चुकारे तक बैंक में सुरक्षित रखें जायेंगे ।

 

यह भी ध्यान रखा जावे कि ग्रामीण आवास हेतु ऋण बैंक के कर्मचारियों/अधिकारि

 

संशोधित आवास ऋण योजना

1-- प्राथमिक भूमि विकास बैंक हेतु पात्रता -

-राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के ऋण क्षमता के मानदण्डों के अन्तर्गत राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्राथमिक भूमि विकास बैंक ऋण वितरण करेंगे ।

 

2- ऋण हेतु पात्रता-

-निम्न शर्तें पूर्ण करने वाले आवेदकों को आवास योजनानन्तर्गत ऋण उपलब्ध कराया जायेगा:-

अ) प्रार्थी के नाम से स्वयं के स्वामित्व का भूखण्ड/निर्मित भवन हों । पूर्व निर्मित भवन के क्रय हेतु आवासन मण्डल/नगर पालिका/नगर निगम, अन्य संस्था अथवा व्यक्ति से किये गये इकरारनामें/आवंटन पत्र की प्रति के आधार पर ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

ब) प्राथमिक भूमि विकास बैंक के कार्यक्षेत्र में आवास निर्माण/मरम्मत/खरीदने हेतु ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

स) प्रार्थी के पास पर्याप्त प्रतिभूति होनी चाहिये (चल - अचल सम्पत्ति) ।

द) प्रार्थी को स्वयं के आवास हेतु भवन की आवश्यकता हो । प्रस्तावित भवन की न्यनूनतम आयु 30 वर्ष हो ।

 

3- उद्देश्य--

नवीन भवन निर्माण, आवासन मण्डल/संस्था/किसी व्यक्ति से भवन क्रय करने हेतु अथवा वर्तमान भवन की मरम्मत/ पुनरुत्थान/ अतिरिक्त निर्माण कार्य हेतु ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

 

4- भवन के निर्माण/क्रय हेतु आवश्यक अभिलेख--

(अ) भूखण्ड/निर्मित भवन के स्वामित्व संबंधित आवश्यक मूल दस्तावेज (आवंटन पत्र, साइट प्लान, लीज डीड आदि) ।

(ब) पंचायत/ स्थानीय निकाय से आवश्यक अनुमति।

स) भूखण्ड/निर्मित भवन के संबंध में सब रजिस्ट्रार कार्यालय से गत 12 वर्षों का भार प्रमाणपत्र ।

(द) सिविल इंजिनियर/ वास्तुविद द्वारा निरूपित भवन निर्माण की अनुमानित लागत एवं नक्शे की प्रति।

(य) आवश्यक होने पर कृषि भूमि को आवासीय भूमि में रूपान्तरण संबंधित आदेश ।

(र) वैतनिक कर्मचारियों के मामलों में गत माह का वेतन प्रमाण पत्र, फार्म नं- 16(गत वर्ष का) तथा राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 की धारा 41 के अन्तर्गत वेतन से ऋण कटौती करने का अधिकार पत्र व नियोक्ता की सहमति/समस्त किस्तो के अग्रिम चैक्स ।

(ल) आवासन मण्ड़ल/नगरपालिका/नगर विकास न्यास/निगम/अन्य संस्था/व्यक्ति से प्राप्त आवंटन पत्र अथवा इकरारनामा ।

(व) प्रारम्भिक भुगतानों की मूल रसीदें एवं भार दर्ज कराने के सम्बन्ध में ना-आपत्ति प्रमाण पत्र ।

(ग) लीज डीड ।

(घ) आवास सम्बन्धी प्रमाण पत्र(राशन कार्ड/फोटो परिचय पत्र/बिजली या पानी का बिल/पेन कार्ड/पासपोर्ट की प्रति) ।

 

5- भवन का अनुमानित मूल्य--

(अ) भवन के अनुमानित मूल्य के आंकलन में रजिस्ट्रेशन शुल्क, विधिक शुल्क, बीमे की किश्त, विद्युतीकरण, प्लम्बरींग, वर्षा जल संग्रहण संरचना, सेनिटेशन आदि को सम्मिलित करके किया जा सकता है।

(ब) भवन निर्माण की अनुमानित लागत का अनुमान पत्र राजकीय सहायक/कनिष्ठ अभियंता/वास्तुविद्/मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्त्ता से प्राप्त किया जावेगा ।

(स) आवास इकाई की लागत 20-00 लाख से अधिक नहीं होगी।

(द) मरम्मत/पुनरूद्धार/वर्षा जल संग्रहण संरचना/सेनिटेशन की अधिकतम लागत 7-50 लाख रू0 होगी।

 

6- ऋण सीमा --

अ) प्रस्तावित निर्माण की लागत का अधिकतम 75 प्रतिशत अथवा ऋण क्षमता/ ऋण चुकाने की क्षमता के आधार पर ऑकलित ऋण क्षमता में जो भी कम हो तक ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा।

ब) नवीन भवन/अतिरिक्त निर्माण कार्य हेतु अधिकतम 15-00 लाख रुपये तक एवं मरम्मत/पुर्ननिर्माण/अपग्रेडेशन हेतु अधिकतम 5-00 लाख रुपये तक ऋण स्वीकृत किया जा सकता है । नवीन भवन/अतिरिक्त निर्माण कार्य हेतु 8-00 लाख रू तथा मरम्मत/पुर्ननिर्माण/अपग्रेडेशन हेतु अधिकतम 3-00 लाख रुपये तक के ऋण प्राथमिक बैंक स्तर पर स्वीकृत किये जाते है तथा इससे अधिक के ऋण राज्य भूमि विकास बैंक स्तर पर स्वीकृत किये जाते है।-

 

7- प्रत्याभूति

आवास ऋण प्रथमत: भूखण्ड(जिस पर आवास निर्माण किया जाना है / निर्मित मकान अथवा क्रय किये जा रहे मकान की प्रत्याभूति पर उपलब्ध कराये जायेंगे। ऋण की सुरक्षा हेतु आवश्यकता होने पर निम्न अतिरिक्त/वैकल्पिक प्रत्याभूति भी प्राप्त की जा सकती है

1- कृषि भूमि ।

2- आवासीय भूखण्ड ।

3- किसान विकास पत्र/राष्ट्रीय बचत पत्र ।

4- भूमि विकास बैंकों में सावधि जमा ।

किसान विकास पत्र/राष्ट्रीय बचत पत्र/ भूमि विकास बैंकों में सावधि जमा को बैंक के पक्ष में नामॉकित करवाया जावेगा ।

 

8- ऋण क्षमता का ऑकलन

अ)प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत कृषि भूमि / आवासीय भूखण्ड का मूल्य उस क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार से प्राप्त गत तीन वर्षो की औसत विक्रय दर के आधार पर किया जावेगा । उपरोक्त प्रकार प्राप्त भूमि के मूल्य एवं प्रस्तावित भवन की लागत का अधिकतम 60 प्रतिशत तक ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

ब) किसान विकास पत्र/राष्ट्रीय बचत पत्र/भूमि विकास बैंकों में सावधि जमा के खरीद मूल्य के 80 प्रतिशत तक की राशि को ऋण क्षमता के ऑकलन में सम्मिलित किया जा सकता है ।

 

9- ऋण भुगतान क्षमता

अ) कृषि भूमि से प्राप्त आय का ऑकलन शीर्ष बैंक द्वारा जारी जिलेवार मापदण्ड़ों अथवा प्रार्थी द्वारा वास्तव में ली जा रही पैदावार के आधार पर किया जायेगा ।

ब) कृषि से सम्बन्धित अन्य व्यवसाय अथवा उद्योग से प्राप्त नियमित आय को भी प्रार्थी की कुल आय में सम्मिलित किया जा सकता है । उक्त आय को सुनिश्चित किया जावे ।

स) व्यवसाय से प्राप्त आय का ऑकलन गत तीन वर्षो के आयकर निर्धारण के आधार पर किया जावे ।

द) वैतनिक कर्मचारियों के केस मेें समस्त कटौतियों के पश्चात्‌ प्राप्त शुद्ध वेतन को प्रार्थी की कुल आय में सम्मिलित किया जायेगा ।

उपरोक्त प्रकार प्राप्त कुल आय का अधिकतम 35 प्रतिशत तक प्रार्थी की ऋण चुकाने की क्षमता मानी जायेगी। ऋण देने से पूर्व ऋण आवश्यकता एवं ऋण की चुकोती क्षमता का वास्तविक ऑकलन अत्यन्त आवश्यक है।

 

10- ऋण की अवधि एवं ऋण चुकारे की प्रक्रिया

अ) नवीन भवन हेतु वितरित ऋण के चुकाने की अधिकतम अवधि 15 वर्ष होगी जिसमें अधिकतम 18 माह की ग्रेस अवधि सम्मिलित है ।

ब) भवन मरम्मत/पुर्ननिर्माण/अपग्रेडेशन हेतु ऋण के चुकारे की अधिकतम अवधि 5 वर्ष होगी। इसमे ग्रेस अवधि देय नहीं होगी।

स) केवल कृषि भूमि के आधार पर वितरित ऋणों की वसूली मासिक/त्रैमासिक/अर्द्धवार्षिक किश्तों में भी की जा सकेगी । अन्य केसेज में ऋण की वसूली मासिक किश्तों में की जावेगी । ग्रेस अवधि में केवल ब्याज ही वसूल किया जावेगा।

द) किश्तों का निर्धारण साम्य प्रणाली (इक्वेटेड इन्स्टालमेन्ट) के आधार पर किया जावेगा ।

 

11- जमानत

आवासीय भवन एवं भूखण्ड़ की प्रत्याभूति के आधार पर स्वीकृत ऋणों में दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों की जमानत प्राप्त की जावेगी। जमानतदारों द्वारा निर्धारित प्रपत्र में शपथ पत्र एवं अन्य आवश्यक पत्रादि प्रस्तुत करने होंगे तथा उनके स्वयं के नाम की अचल सम्पत्ति के स्वामित्व सम्बन्धित दस्तावेजों की सत्यापित प्रतिलिपि बैंक में प्रस्तुत करनी होगी ।

 

12- ब्याज दर

बैंक द्वारा समय≤ पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।

 

13- अन्य

(1) संयुक्त ऋण के केस में दो व्यक्तियों तक ही आवास ऋण संयुक्त रुप से स्वीकृत किया जा सकता है तथा वे निकट के रिश्तेदार हों जिनके द्वारा भवन का संयुक्त रुप से आवासीय उपयोग सुनिश्चित किया जावें ।

(2) राज्य सरकार/बैंक/बीमा/अर्द्धसरकारी संगठन/सहकारी संस्थाओं एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यवसायिक संगठनों में कार्यरत स्थाई/नियमित वैतनिक कर्मचारियों एवं गत तीन वर्षो से आयकरदाता व्यवसायियों को को ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

(3) वैतनिक कर्मचारियों के केस में ऋण की अवधि उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि तक सीमित रखी जावें ।

(4) पति एवं पत्नि के संयुक्त ऋण के केस में उनकी नियमित वैतनिक शुद्ध आय को उनके ऋण चुकारे की क्षमता के ऑकलन में जोड़ा जा सकता है

(5) बैंक ऋण से क्रय/निर्मित सम्पत्ति बैंक के पक्ष में साधारण बन्धक के रुप में रहेगी एवं बैंक का उस सम्पत्ति पर प्रथम भार होगा ।

(6) प्रत्येक केस में प्राथमिक बैंक द्वारा प्रत्याभूति एवं भूखण्ड के बारें में विधि सलाहकार की राय प्राप्त की जावे ।

 

14- बीमा

बैंक के ऋण से बनाये गये भवन/क्रय किये गये भवन का ऋणी एवं बैंक के संयुक्त नाम से बीमा कराया जायेगा । बीमें की मूल प्रति बैंक में ऋणी सदस्य की पत्रावली में रखी जावेगी जिसका नवीनीकरण पूर्ण ऋण के चुकारे तक प्रत्येक वर्ष ऋणी द्वारा कराया जायेगा । बीमा राशि लाभार्थी द्वारा वहन की जायेगी । यदि ऋणी द्वारा समय पर बीमें का नवीनीकरण नहीं कराया जाता है तो बैंक द्वारा नवीनीकरण कराकर प्रार्थी के खाते में प्रीमियम की राशि डेबिट की जाकर ऋणी को सूचित किया जावेगा ।

 

15- रजिस्ट्री बैंक ऋण से निर्मित भवन का मूल पट्‌टा/आवश्यक अभिलेख एवं बैंक ऋण से क्रय किये गये भवन के मूल दस्तावेज तथा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जारी की गई रसीद पूर्ण ऋण के चुकारे तक बैंक में सुरक्षित रखें जायेंगे ।

 

16- हिस्सा राशि :- 1000 के हिस्से ऋनी को क़य करने होंगै ।

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