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सूचना

एकमुश्‍त समझौता योजना 2017-18 के तहत अवधिपार ऋणियों को ब्‍याज में 50 प्रतिशत छूट की घोषणा
प्राथमिक भूमि विकास बैंकों द्वारा वर्तमान में किसानों एवं लघु उद्यमियों को 12.85 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध करवाये जा रहे हैं।

 
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सूचना प्रोद्योगिकी योजनाएं

viewmore योजना का संक्षिप्त परिचय     viewmore परियोजना लागत व ऋण राशि   viewmore प्रशासनिक शुल्क
viewmore योजना का उद्देश्य     viewmore ऋण की सिक्यूरिटी   viewmore हिस्सा राशि
viewmore ऋण की पात्रता     viewmore ऋण क्षमता का ऑकलन   viewmore ब्याज दर
viewmore परियोजना व्यय     viewmore ऋण चुकारे की क्षमता   viewmore ऋण राशि का निर्गमन
viewmore मूलभूत सुविधाए     viewmore ऋण स्वीकृति प्रक्रिया   viewmore आवश्यक अभिलेख
viewmore परियोजना रिपोर्ट              

1- योजना का संक्षिप्त परिचय-

- वर्तमान में सूचना प्रोद्योगिकी का क्षैत्र काफी विस्तृत हो गया है, और इसके विस्तार की गति आगे भी बने रहना अवश्यभावी है । वर्तमान समय में व्यक्ति न केवल अपने निवास पर बैठे विदेश में बैठ व्यक्ति से बात कर सकता है बल्कि उसे बात करते हुए देख भी सकता है । अपनी इच्छित जानकारी घर बैठे अपने कम्प्यूटर से प्राप्त कर सकता है । सूचना प्रोद्योगिकी ने व्यक्ति की कार्यक्षमता व दक्षता में अत्यधिक वृद्धि कर दी है । सूचना प्रोद्योगिकी का क्षैत्र इतना विस्तृत है कि इसमें रोजगार के अवसर अत्यधिक है और इसीलिए युवको का झुकाव इस और बढ़ता जा रहा है । राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक ने इसमें रोजगार के अवसर को ध्यान में रख इस क्षैत्र को अपनी स्ववित्त पुर्नभरण योजना में शामिल कर लिया है । इस योजना के अन्तर्गत सूचना प्रोद्योगिकी से संबंधित किसी भी तरह की इकाई को ऋण दिया जा सकता है । योजनान्तर्गत प्रोद्योगिकी से सम्बन्धित उत्पादन गतिविधि की इकाई, जोब वर्क की इकाई, सेवा इकाई अथवा प्रशिक्षण इकाई हेतु ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

 

2- योजना का उद्धेश्य -

-इस योजना का उद्धेश्य बेरोजगार शिक्षित युवको के लिए रोजगार उपलब्ध कराने हेतु सूचना प्रोद्योगिकी से संबंधित किसी भी तरह की इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय साधन उपलब्ध कराना है ताकि ऐसे युवक जो शिक्षित व प्रशिक्षित है, परन्तु वित्त के अभाव में केवल नौकरी के लिए भागदौड़ करते रहते हैं । वैसे तो सूचना प्रोद्योगिकी का क्षैत्र इतना विस्तृत है कि उन्हें किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता है, निम्न प्रकार की गतिविधियो इसमें शामिल की जा सकती है|-

1- टेलीकोम सेन्टर- पी-सी-ओ-एस-टी-डी-, आई-एस-डी- सेवाए, फैक्स सेवाएं इन्टरनेट सेवाऐं आदि

2- कम्प्यूटर शिक्षा/प्रशिक्षण केन्द्र

3- सोफ्‌टवेयर सेवाएं, इम्बेडेड सोफ्‌टवेयर

4- पी-सी-, सर्वर इत्यादि जैसे आई-टी- उपकरण उत्पादक यूनिट्‌स

5- रूटर्स, फायर वॉल, स्विचेज इत्यादि जैसे नेट वर्किंग उपकरण

6- अन्य आई-टी- अथवा इलेक्ट्रोनिक घटक, बिजनेस प्रोसेस आउट सोर्सिंग/काल सेन्टर अथवा दोनो ही जैसी आई-टी- सेवाए

7- टेलीकोम सेन्टर जैसे आई-टी- इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करने वाले केन्द्र अथवा आई-टी- कनेक्टिविटी प्रदान करने वाले केन्द्र ।

8- सभी रोजगार सृजन करने वाली ग्रामीण प्रोद्योगिकियो ।

सहकारी भूमि विकास बैंके अपने क्षैत्र में सूचना प्रोद्योगिकी से संबंधित किसी भी प्रकार की इकाई के लिए ऋण उपलब्ध करा सकेगी । उक्त ऋण नई इकाई स्थापना हेतु अथवा कार्यरत इकाई को विकास हेतु भी दिया जा सकता है ।

 

3- ऋण की पात्रता-

-ऋण उपलब्ध कराने हेतु ऋणी की पात्रता निम्न बातों पर निर्भर करेगी:-

1- सूचना प्रोद्योगिकी इकाई हेतु ऋण एक या अधिक व्यक्तियों, समिति अथवा ट्रस्ट को प्राथमिक बैंक के उपनियमो के अन्तर्गत संयुक्त रूप से ही दिया जा सकेगा।

2- ऋणी व्यक्ति का सम्बन्धित भूमि विकास बैंक के कार्यक्षैत्र का निवासी होना आवश्यक होगा । साथ ही प्रस्तावित इकाई का स्थापना स्थल भी बैंक के कार्यक्षैत्र में होना आवश्यक होगा ।

3- ऋणी का प्रस्तावित इकाई के लिए आवश्यक योग्यताधारक व अनुभवी होना आवश्यक होगा । केवल विशेष परिस्थिति में वांछित योग्यता व अनुभवी व्यक्ति को इकाई में नियोजित करने के आधार पर भी ऋण दिया जा सकेगा ।

4- यदि प्रस्तावित इकाई सूचना प्रोद्योगिकी से संबंधित किसी प्रशिक्षण केन्द्र की है तो उसका एफीलिएशन किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी/बोर्ड/संस्था से हो गया हो ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को वांछित परीखा में बैठने व उर्तीण होने पर मिलने वाली डिग्री या प्रमाण पत्र मान्यता प्राप्त हो

5- प्रस्तावित इकाई यदि उत्पादन इकाई हो तो उसका कच्चा माल निरन्तर रूप से मिलना सुनिश्चित हो । इसी प्रकार उत्पादन का विक्रय हेतु बाजार की सुनिश्चित हो ।

6- प्रस्तावित इकाई यदि जोब वर्क इकाई है या सेवा इकाई हो तो उसको जोब मिलना सुनिश्चित हो ।

7- प्रस्तावित इकाई के लिए सभी मूलभूत सुविधाए, पानी, बिजली, आवागमन व संचार के साधन आदि उपलब्ध हो ।

8- ऋणी ऋण के लिए आवश्यक सिक्यूरिटी व आवश्यक निजी अंशदान उपलब्ध करा सके ।

 

4- परियोजना व्यय:--

परियोजना व्ययों में मुख्यत: निम्न मद शामिल किये जा सकेंगे:-

1- भवन निर्माण व्यय यदि आवश्यक हो । यथा सम्भव इस प्रकार की यूनिटो में भवन निर्माण का व्यय नहीं हो या न्यूनतम हो ।

2- फर्नीचर क्रय पर होने वाला व्यय

3- प्रस्तावित युनिट के लिए वांछित सभी उपकरण

4- राजकीय विभागो में जमा कराई जाने वाली वाली सिक्यूरिटी राशि

5- अन्य व्यय जो भी प्रस्तावित युनिट की स्थापना व संचालन के लिए आवश्यक हो।

6- प्रारम्भिक व्यय राशि

 

5- मूलभूत सुविधाए--

रइकाई की स्थापना हेतु निम्न मूलभूत सुविधाओं का होना सुनिश्चित किया जाना चाहिए-

1- कम्प्यूटर प्रशिक्षण, संचालन एवं रखरखाव हेतु प्रशिक्षित व्यक्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो ।

2- परियोजना स्थल संचार सुविधाओं से जुड़ा हो ।

3- विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित हो

4- प्रस्तावित इकाई के संचालन हेतु पर्याप्त कार्य एवं व्यवसाय उपलब्ध व्यवसाय हो।

 

 

6- परियोजना रिपोर्ट-

- परियोजना रिपोर्ट में संस्थान की क्षेत्र के अनुसार उपयोगिता, प्रर्वतकों की संचालन क्षमता, आधार भूत सुविधाओं की व्यवस्था, प्रारम्भिक एवं परियोजना पूर्व खर्च, मदवार व्यय, प्रोफिटेविलिटी स्टेटमेन्ट, कैश-फलों स्टेटमेन्ट, कार्यशील पूंजी की गणना एवं आर्थिक संगणनायें जैसे ब्रेक इविन विन्दु, डेब्ट सर्विस कवरेज रेशो आदि का समावेश हो। इकाई द्वारा प्रस्तावित सेवाओं के अनुसार आय एवं खर्चो की पूर्ण विगत प्राप्त की जानी आवश्यक है जिससे परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता की जॉंच की जा सके ।

 

7- परियोजना लागत व ऋण राशि--

प्राथमिक भूमि विकास बैंक ऐसी परियोजना को ही ऋण हेतु स्वीकार करेगा जिनकी कुल परियोजना लागत 50.00 लाख से अधिक नहीं होगी। उद्यमी व्यक्ति/ समिति/ ट्रस्ट का न्यूनतम्‌ अंशदान 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक अवश्य होगा परन्तु बैंक ऋण प्राथमिक बैंक हेतु शीर्ष बैंक द्वारा निर्धारित नार्मस्‌ के अनुसार 20.00 लाख तक का ऋण स्वीकृत किया जा सकता है ।

 

8- ऋण की अवधि--

ऋण की अवधि का निर्धारण परियोजना की सम्भावित बचत के आधार पर होगा परन्तु योजनान्तर्गत ऋण के चुकारे की अवधि न्यूनतम्‌ 2 वर्ष व अधिकतम्‌ 10 वर्ष होगी जिसमें अधिकतम्‌ 18 माह की ग्रेस अवधि (मोरेटोरियम पीरियड) भी शामिल होगा। ऋण का भुगतान परियोजना के अनुसार मासिक/त्रैमासिक/अर्द्धवार्षिक किश्तों में किया जा सकेगा । ग्रेस अवधि का ऑकलन भी परियोजना की आवश्यकता के आधार पर अधिकतम 18 माह तक किया जा सकेगा तथा ग्रेस अवधि(मोरेटोरियम पीरियड) में केवल ब्याज देय होगा।

 

9- ऋण की सिक्यूरिटी--

प्रत्याभूति स्वरुप आवेदक/आवेदकों के नाम स्वयं के स्वामित्व की भारमुक्त कृषि/ आवासीय/ वाणिज्यिक भूमि/ भवन निम्न प्रकार स्वीकार किये जा सकते है :-

क्र-सं- विवरण मूल्यांकन की विधि

1- कृषि/ आवासीय भूमि/ वाणिज्यिक भूमि गत तीन वर्षो की औसत विक्रय दर के आधार पर ।

2- पूर्व निर्मित भवन एवं / अथवा प्रस्तावित भवन मूल्यांकन कनिष्ठ/सहायक अभियन्ता अथवा राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित इंजीनियर/वेल्यूअर द्वारा ।

3- चल सम्पत्ति जैसे आवेदक के नाम एन-एस-सी-, किसान विकास पत्र एवं/अथवा प्राथमिक भूमि विकास बैंक में सावधि जमा फेस वेल्यू पर अधिकतम 80 प्रतिशत तक ।

ऋण से सृजित समस्त चल एवं अचल सम्पत्ति बैंक के पक्ष में बन्धक/ हाइपोथिकेट (आवश्यकतानुसार) कराई जावेगी।

 

10- ऋण क्षमता का ऑकलन -

- रहन हेतु प्रस्तावित भूमि, पूर्व निर्मित भवन एवं प्रस्तावित स्थायी निर्माण कार्य के मूल्यांकन का 60 प्रतिशत तक ऋण क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है। ऋण क्षमता के ऑकलन में मशीनरी/ इक्यूपमेन्ट्‌स, पुस्तकें आदि चल सम्पत्ति को सम्मिलित नहीं किया जावें।

 

 

11- ऋण चुकारे की क्षमता -

- प्रस्तावित परियोजना के एप्रेजल उपरान्त सम्भावित शुद्ध आय का 75 प्रतिशत तक ऋण चुकारे की क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है ।

 

12- ऋण स्वीकृति प्रक्रिया -

- ऋण प्रार्थना पत्र एवं परियोजना रिपोर्ट प्राप्त होने पर सम्बन्धित बैंक अधिकारी उसकी विस्तृत जॉच करेंगे तथा सुनिश्चित करेंगे कि प्रस्तुत परियोजना रिपोर्ट एवं प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि/भवन आदि नियमानुसार है । तत्पश्चात्‌ अकृषि उद्येश्यों हेतु शीर्ष बैंक द्वारा पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शाखा अधिकारियों द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जावेगी तथा शाखा सचिव प्राथमिक बैंक के प्रधान कार्यालय को अग्रिम कार्यवाही हेतु पत्रावली प्रेषित करेंगे। प्रत्येक केस में प्रत्याभूति के सम्बन्ध में प्राथमिक बैंक द्वारा विधि सलाहकार की राय ली जावेगी । प्राथमिक बैंक के प्रधान कार्यालय स्तर पर पत्रावली की पुन: जॉच कर पत्रावली स्वीकृति योग्य होने पर अकृषि उद्येश्यो हेतु गठित एप्रेजल कमेटी द्वारा इकाई का एप्रेजल कर स्वीकृति सम्बन्धी अग्रिम कार्यवाही की जायेगी ।

ऋण स्वीकृत होने पर बैंक द्वारा स्वीकृति पत्र जारी किया जायेगा जिसमें ऋण स्वीकृति की समस्त शर्तो का उल्लेख होगा । स्वीकृति पत्र में ऋण राशि मय मदवार विगत, किश्तों के वितरण की प्रक्रिया, ब्याज दर, ऋण चुकाने की अवधि, अवधिपार राशि पर दण्डनीय ब्याज की दर, दुरुपयोग होने पर एकमुश्त वसूली की शर्त, बीमा की अनिवार्यता आदि का उल्लेख आवश्यक रुप से किया जावेगा तथा इसकी प्रार्थियों से लिखित में सहमति प्राप्त की जावेगी।

पत्रावली में आक्षेप पाये जाने पर प्रार्थियों को प्राथमिक बैंक द्वारा पत्र द्वारा अवगत कराया जावेगा ।

 

13- प्रशासनिक शुल्क--

योजनान्तर्गत स्वीकृत ऋण राशि पर 0-25 प्रतिशत की दर से प्रशासनिक शुल्क देय होगा ै।

 

14- हिस्सा राशि -

-स्वीकृत ऋण राशि पर प्राथमिक बैंक द्वारा निम्न प्रकार हिस्सा राशि प्राप्त की जावेगी :-

ऋण राशि ऋण राशि पर हिस्सा राशि

रुपये 2-00 लाख तक 5 प्रतिशत

रुपये 2-00 लाख से अधिक पर 3 प्रतिशत

 

15- ब्याज दर -

- बैंक द्वारा समय≤ पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।

 

16- ऋण राशि का निर्गमन

विभिन्न व्ययों के लिये स्वीकृत ऋण राशि निम्न प्रकार जारी की जायेगी:-

(क) भवन निर्माण हेतु: तीन किश्तों में । प्लिन्थ लेवल तक निर्माण उपरान्त प्रथम किश्त, छत लेवल तक निर्माण पश्चात्‌ द्वितीय किश्त एवं फिनिशिंग स्तर पर तृतीय किश्त

(ख)फर्नीचर, कम्प्यूटर एवं अन्य साजो सामान, इक्विपमेन्ट्‌स, पुस्तकें, उपकरण आदि सीधे सप्लायर को रेखांकित चैक द्वारा ।

(ग) अन्य व्ययों हेतु आवश्यकता के अनुसार ।

(घ) कार्यशील पुंजी आवश्यकता के अनुसार ।

 

17- बीमा--

बैंक ऋण से स्थापित इकाई का कम्प्रीहेन्सिव बीमा करवाया जावे तथा इसकी सत्यापित प्रति पत्रावली में संलग्न किया जावे। बीमें का प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराया जावें तथा यदि ऋणी द्वारा नवीनीकरण नहीं कराया जावे तो बैंक द्वारा स्वयं नवीनीकरण कराकर प्रीमियम की राशि ऋण खातें में ऋणी के नाम डेबिट कर दी जावें। इस सम्बन्ध में ऋण वितरण से पूर्व प्रार्थियों से सहमति प्राप्त की जावें । बीमा पॉलिसी में बैंक का नाम वित्तदाता की हैसियत से दर्ज कराया जावें तथा उसे बैंक के नाम डिस्चार्ज कराया जावें ।

 

18- आवश्यक अभिलेख--

उक्त योजना हेतु स्वास्थ्य सेवा ऋण योजना के लिए निर्धारित ऋण प्रार्थना पत्र में सूचना प्रोद्योगिकी उद्धेश्य से संबंधित समस्त विवरण, एस्टीमेट आदि प्राप्त किये जाय । प्रस्तावित इकाई के विवरण में भी इस योजना की स्थापना एवं संचालन से संबंधित सभी सूचनाऐं प्राप्त की जाये । ऋण प्रार्थना पत्र के साथ मुख्यत: निम्न अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे

 

1- प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि/भवन आदि के मूल पत्रादि ।

2- कृषि भूमि के केस में अन्तिम जमाबन्दी, खसरा गिरदावरी एवं आवश्यकतानुसार नामान्तरकरण की प्रति । पटवारी द्वारा प्रमाणित भूमि का नक्शा ।

3- रहन हेतु प्रस्तावित भूमि के मूल्यांकन के सम्बन्ध में उस क्षेत्र की समान किस्त की भूमि की बिक्री के गत तीन वर्षो के ऑकडे जो क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार से प्राप्त किये जावें ।

4- परियोजना रिपोर्ट दो प्रतियों मेंं। परियोजना रिपोर्ट में प्रस्तावित मशीनरी, फर्नीचर एवं अन्य प्रस्तावित खरीददारियों के सम्बन्ध में अधिकृत डीलर/ विक्रेताओं के कोटेशन ।

5- प्रस्तावित भवन एवं अन्य निर्माण कार्य के ऐस्टीमेट तथा स्थानीय निकाय से संस्था स्थापित करने एवं भवन निर्माण की अनुमति ।

6- समिति अथवा ट्रस्ट के पंजीकरण प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति । संस्था के संविधान के अन्तर्गत उक्त ऋण प्राप्त करने हेतु नामांकित अधिकारियों हेतु पारित प्रस्ताव की सत्यापित प्रति ।

7- केन्द्र/ राज्य सरकार एवं स्थानीय निकाय तथा आवश्यकतानुसार अन्य सम्बद्ध विभागो से अनुमति ।

8- संस्था के पदाधिकारियों एवं/अथवा मुख्य कार्यकारी को इकाई के संचालन के सम्बन्ध में अनुभव प्रमाण पत्र ।

9- अकृषि उद्येश्यों हेतु प्रार्थियों एवं जमानतदारों से पूर्व निर्धारित प्रपत्रों में शपथ पत्र प्राप्त किये जाये।

10- अकृषि उद्देश्यों हेतु पूर्व निर्धारित समस्त अन्य पत्रादि/ अभिलेख

 

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1- प्रथमिक बैंक के अधिकरी ऋण वितरन के पश्चात इकाइ का 6 माह मै कम से कम 1 बार निरीक्षण आवश्यक रुप से करें तथा सुनिशिच्त करें कि वितरीत ऋण क सदुपयोग किया गया हो ।

2- प्रथमिक बैंक,राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक नाबार्ड के प्रतिनिधि इकाइ के निरिक्षण/विजीट कर सकेंगै । तथा आव्श्यक सुचनाये प्राप्त कर सकेगै। संस्था को प्रतिवर्ष वार्षिक --- भी बैंक को प्रप्त करने होंगै। इस सम्बन्ध मै ऋन वितरण से पुर्व ऋणी सदस्यो मै मिलीवत मै सहमति प्राप्त कि जाये ।

 

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