name
name
name
name
name
name

सूचना

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों द्वारा वर्तमान में किसानों एवं लघु उद्यमियों को 12.50 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध करवाये जा रहे हैं।

   
name

शैक्षणिक संस्थान हेतु ऋण योजना

राज्य की प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक अपने कार्यक्षेत्र में निजी क्षेत्र की अच्छी शिक्षण संस्थाओं की स्थापना, विकास आदि के लिए ऋण उपलब्ध करा सकेंगी। प्राथमिक बैंकों द्वारा अपने कार्य क्षेत्र में प्राथमिक् माध्यमिक, उच्च माध्यमिक स्कूल, कॉलेज तथा तकनीकी शिक्षण संस्था, जैसे मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, इंजिनियरिंग कॉलेज, प्रोद्योगिक तकनीकी संस्थान आदि के लिए इस योजनान्तर्गत ऋण स्वीकृत किये जा सकते है।

 

view more   view more ऋण चुकारे की क्षमता 
view more   view more ऋण स्वीकृति प्रक्रिया
view more   view more प्रशासनिक शुल्क 
view more   view more हिस्सा राशि
view more   view more ब्याज दर
view more   view more ऋण राशि का निर्गमन
view more   view more आवश्यक अभिलेख
view more   view more शिक्षण संस्थान हेतु ऋण स्वीकृति के लिए प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन 
view more      


1- ऋण की पात्रता--

शैक्षणिक संस्थान की स्थापना या विकास हेतु प्राथमिक बैंक के कार्य क्षेत्र में ऋण ऐसे व्यक्ति, पंजीकृत समिति या ट्रस्ट को दिए जा सकेंगे जो प्रस्तावित शिक्षण संस्था के संचालन में सक्षम हो। समिति या ट्रस्ट के मामले मे समिति या ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी या मुख्य कार्यकारी का शैक्षणिक संस्थान के संचालन में सक्षम होना आवश्यक होगा। साथ ही प्रस्तावित संस्थान के संचालन के लिए राजकीय सम्बन्धित विभागों से स्वीकृतियॉ/ अनुमति प्राप्त हो और उस स्कूल, कॉलेज, तकनीकी संस्थान के लिए वांछित एफिलिएशन बोर्ड, यूनिवर्सिटी या तकनीकी बोर्ड आदि से मिल गया हो । इसके अतिरिक्त तकनीकी संस्थान के मामले में वांछित योग्यता वाले शिक्षकों एवं आधारभूत ढ़ॉचे की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई हो।

 

2- योजना का उद्देश्य--

इस योजना का उद्देश्य अच्छी शिक्षण संस्थाओं की स्थापना हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर बच्चों व युवाओं को शिक्षा के सुअवसर उपलब्ध कराना है।

 

3- योजना के मद--

इस योजना में ऋण हेतु मुख्यत निम्न मदों को शामिल किया जा सकेग--

1- भवन निर्माण व्यय (स्कूल/कॉलेेज, लाईब्रेरी, छात्रावास, कार्यालय आदि हेतु)

2- फर्नीचर क्रय पर होने वाला व्यय ।

3- कम्प्यूटर व अन्य शिक्षण सामग्री का व्यय ।

4- प्रयोगशाला का व्यय ।

5- आवश्यकतानुसार वाहन (विद्यार्थियों को लाने व लेजाने हेतु) ।

6- खेलकूद व मनोरंजन का सामान क्रय हेतु ।

7- संस्थान हेतु अन्य आवश्यक सामग्री का व्यय ।

8- आरम्भिक व्यय राशि ।

9- संस्थान की स्थापना हेतु अन्य आवश्यक खर्चे ।

10- आवश्यकतानुसार कार्यशील पूजी। इसमें एक-दो माह के वेतन/मजदूरी, विद्युत खर्च एवं अन्य विविध खर्चे सम्मलित किये जा सकते हैं।

 

नोट-- भवन निर्माण हेतु ऋण के मामले में यह आवश्यक होगा कि वह भूमि जिस पर निर्माण होना हो वह आवेदक के नाम हो । भूमि क्रय हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जावेगी ।

 

4- ऋण का उद्देश्य--

शैक्षणिक संस्थान की स्थापना हेतु सम्बन्धित प्राथमिक भूमि विकास बैंक में निर्धारित ऋण आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जावेगा। आवेदन पत्र का प्रारूप सलंग्न है । आवेदन पत्र के साथ प्रस्तावित संस्थान की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सलंग्न की जायेगी । रिपोर्ट में मुख्य रूप से प्रवर्तक या समिति/ ट्रस्ट के पदाधिकारी/ मुख्य कार्यकारी का पूर्ण परिचय, उनकी शैक्षणिक/ तकनीकी योग्यता, अनुभव, आर्थिक सक्षमता, प्रस्तावित शिक्षण संस्थान का स्कोप, शैक्षणिक संस्थान हेतु वांछित स्टाफ की उपलब्धता, राजकीय विभागों/ बोर्ड/ यूनिवर्सिटी के एफीलियेशन की विगत, प्रस्तावित भूमि जहॉ संस्थान का भवन बनना है, की विगत, उसके दस्तावेज, निर्माण हेतु वांछित स्वीकृति की विगत, योजना का लागत अनुमान, प्रारंभिक व्ययों की विगत, प्रवर्तक का मार्जिन, ऋण चुकाने की अवधि के बारें में पूर्ण जानकारी हों । इसके अतिरिक्त ऋण की सिक्यूरिटी हेतु प्रस्तावित भूमि के स्वामित्व सम्बन्धित पत्रादि, उनका मूल्यांकन आदि का समावेश हो। यदि किसी कार्यरत संस्थान हेतु विकास के लिए ऋण लिया जाता है तो पिछले तीन वर्षों के चार्टेड एकाउन्टटेन्ट से आडिटेड लेखे भी संलग्न करने होंगे।

 

5- परियोजना रिपोर्ट-

- परियोजना रिपोर्ट में संस्थान की क्षेत्र के अनुसार उपयोगिता, प्रर्वतकों की संचालन क्षमता, प्रयोगशाला, पुस्तकालय एवं अन्य आधार भूत सुविधाओं की व्यवस्था, प्रारम्भिक एवं परियोजना पूर्व खर्च, सम्भावित छात्रों की कोर्सवार संख्या, श़िक्षण व्यवस्था, मदवार व्यय, प्रोफिटेविलिटी स्टेटमेन्ट, कैश-फलों स्टेटमेन्ट, कार्यशील पूंजी की गणना एवं आर्थिक संगणनायें जैसे ब्रेक इविन विन्दु, डेब्ट सर्विस कवरेज रेशिओं आदि संलग्न हो।

 

6- परियोजना लागत व ऋण राशि-

- प्राथमिक भूमि विकास बैंक ऐसी परियोजना को ही ऋण हेतु स्वीकार करेगा जिनकी कुल परियोजना लागत 5.00 लाख से अधिक नहीं होगी। उद्यमी व्यक्ति/ समिति/ ट्रस्ट का न्यूनतम्‌ अंशदान 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक अवश्य होगा। PLDB's शीर्ष बैंक द्वारा निर्धारित नार्मस के अनुसार ऋण स्वीक्र्त किया जा सकता है।

 

7- ऋण की अवधि--

ऋण की अवधि का निर्धारण परियोजना की सम्भावित बचत के आधार पर होगा परन्तु योजनान्तर्गत ऋण के चुकारे की अवधि न्यूनतम्‌ 3 वर्ष व अधिकतम्‌ 10 वर्ष होगी जिसमें अधिकतम्‌ 18 माह की ग्रेस अवधि (मोरेटोरियम पीरियड) भी शामिल होगा। ऋण का भुगतान परियोजना के अनुसार मासिक/त्रैमासिक/अर्द्धवार्षिक किश्तों में किया जा सकेगा । ग्रेस अवधि का ऑकलन भी परियोजना की आवश्यकता के आधार पर किया जायेगा तथा ग्रेस अवधि(मोरेटोरियम पीरियड) में केवल ब्याज देय होगा।

 

8- ऋण की सिक्यूरिटी--

प्रत्याभूति स्वरुप आवेदक/आवेदकों के नाम स्वयं के स्वामित्व की भारमुक्त कृषि/ आवासीय/ वाणिज्यिक भूमि/ भवन निम्न प्रकार स्वीकार किये जा सकते है :-

क्र-सं- विवरण मूल्यांकन की विधि

1- कृषि/ आवासीय भूमि/ वाणिज्यिक भूमि गत तीन वर्षो की औसत विक्रय दर के आधार पर ।

2- पूर्व निर्मित भवन एवं / अथवा प्रस्तावित भवन मूल्यांकन कनिष्ठ/सहायक अभियन्ता अथवा राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित इंजीनियर/वेल्यूअर द्वारा ।

3- चल सम्पत्ति जैसे आवेदक के नाम एन-एस-सी-, किसान विकास पत्र एवं/अथवा प्राथमिक भूमि विकास बैंक में सावधि जमा फेस वेल्यू पर अधिकतम 80 प्रतिशत तक । ऋण से सृजित समस्त चल एवं अचल सम्पत्ति बैंक के पक्ष में बन्धक/ हाइपोथिकेट (आवश्यकतानुसार) कराई जावेगी।

 

9- ऋण क्षमता का ऑकलन--

रहन हेतु प्रस्तावित भूमि, पूर्व निर्मित भवन एवं प्रस्तावित स्थायी निर्माण कार्य के मूल्यांकन का 60 प्रतिशत तक ऋण क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है। ऋण क्षमता के ऑकलन में मशीनरी/ इक्यूपमेन्ट्‌स, पुस्तकें आदि चल सम्पत्ति को सम्मिलित नहीं किया जावें।

 

10- ऋण चुकारे की क्षमता--

प्रस्तावित परियोजना के एप्रेजल उपरान्त सम्भावित शुद्ध आय का 75 प्रतिशत तक ऋण चुकारे की क्षमता का ऑकलन किया जा सकता है ।

 

11- ऋण स्वीकृति प्रक्रिया--

ऋण प्रार्थना पत्र एवं परियोजना रिपोर्ट प्राप्त होने पर सम्बन्धित बैंक अधिकारी उसकी विस्तृत जॉच करेंगे तथा सुनिश्चित करेंगे कि प्रस्तुत परियोजना रिपोर्ट एवं प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि/भवन आदि नियमानुसार है । तत्पश्चात्‌ अकृषि उद्येश्यों हेतु शीर्ष बैंक द्वारा पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शाखा अधिकारियों द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जावेगी तथा शाखा सचिव प्राथमिक बैंक के प्रधान कार्यालय को अग्रिम कार्यवाही हेतु पत्रावली प्रेषित करेंगे। प्रत्येक केस में प्रत्याभूति के सम्बन्ध में प्राथमिक बैंक द्वारा विधि सलाहकार की राय ली जावेगी । प्राथमिक बैंक के प्रधान कार्यालय स्तर पर पत्रावली की पुन: जॉच कर पत्रावली स्वीकृति योग्य होने पर अकृषि उद्येश्यो हेतु गठित एप्रेजल कमेटी द्वारा इकाई का एप्रेजल कर स्वीकृति सम्बन्धी अग्रिम कार्यवाही की जायेगी । ऋण स्वीकृत होने पर बैंक द्वारा स्वीकृति पत्र जारी किया जायेगा जिसमें ऋण स्वीकृति की समस्त शर्तो का उल्लेख होगा । स्वीकृति पत्र में ऋण राशि, किश्तों के वितरण की प्रक्रिया, ब्याज दर, ऋण चुकाने की अवधि, अवधिपार राशि पर दण्डनीय ब्याज की दर, दुरुपयोग होने पर एकमुश्त वसूली की शर्त, बीमा की अनिवार्यता आदि का उल्लेख आवश्यक रुप से किया जावेगा तथा इसकी प्रार्थियों से लिखित में सहमति प्राप्त की जावेगी। पत्रावली में आक्षेप पाये जाने पर प्रार्थियों को प्राथमिक बैंक द्वारा पत्र द्वारा अवगत कराया जावेगा ।

 

12- प्रशासनिक शुल्क--

योजनान्तर्गत स्वीकृत ऋण राशि पर 0-25 प्रतिशत की दर से प्रशासनिक शुल्क देय होगा ।

 

13- हिस्सा राशि--

स्वीकृत ऋण राशि पर प्राथमिक बैंक द्वारा निम्न प्रकार हिस्सा राशि प्राप्त की जावेगी :- ऋण राशि ऋण राशि पर हिस्सा राशि रुपये 2-00 लाख तक 5 प्रतिशत रुपये 2-00 लाख से अधिक पर 3 प्रतिशत

 

14- ब्याज दर--

बैंक द्वारा समय≤ पर परिवर्तित ब्याज दर लागू होगी । अवधिपार राशि पर 3 प्रतिशत की दर से दण्डनीय ब्याज देय होगा ।

 

15- ऋण राशि का निर्गमन--

विभिन्न व्ययों के लिये स्वीकृत ऋण राशि निम्न प्रकार जारी की जायेगी:-

(क) भवन निर्माण हेतु-- तीन किश्तों में । प्लिन्थ लेवल तक निर्माण उपरान्त प्रथम किश्त, छत लेवल तक निर्माण पश्चात्‌ द्वितीय किश्त एवं फिनिशिंग स्तर पर तृतीय किश्त

(ख) वाहन क्रय हेतु-- सीधा अधिकृत वाहन विक्रेता को अधिकार पत्र के आधार पर रेखांकित चैक द्वारा।

(ग)फर्नीचर, इक्विपमेन्ट्‌स, पुस्तकों, प्रयोगशाला उपकरण आदि सीधे सप्लायर को रेखांकित चैक द्वारा ।

(घ) अन्य व्ययों हेतु आवश्यकता के अनुसार ।

(ड-) कार्यशील पूंजी आवश्यकता के अनुसार । ऋण राशि जारी करते समय हर स्तर पर उद्यमी के अंशदान का विनियोग एवं ऋण राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जावें । अनुपयोग/दुरुपयोग पाये जाने पर बैंक को अधिकार होगा कि ऋण की अगली किश्त जारी नहीं की जाये एवं वितरित ऋण राशि की एकमुश्त वसूली की कार्यवाही की जावें ।

 

16- आवश्यक अभिलेख--

निर्धारित ऋण प्रार्थना पत्र के साथ मुख्यत: निम्न अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे :-

1- प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि/भवन आदि के मूल पत्रादि ।

2- कृषि भूमि के केस में अन्तिम जमाबन्दी, खसरा गिरदावरी एवं आवश्यकतानुसार नामान्तरकरण की प्रति । पटवारी द्वारा प्रमाणित भूमि का नक्शा ।

3- रहन हेतु प्रस्तावित भूमि के मूल्यांकन के सम्बन्ध में उस क्षेत्र की समान किस्त की भूमि की बिक्री के गत तीन वर्षो के ऑकडे जो क्षेत्र के सब-रजिस्ट्रार से प्राप्त किये जावें ।

4- परियोजना रिपोर्ट दो प्रतियों मेंं। परियोजना रिपोर्ट में प्रस्तावित मशीनरी, फर्नीचर एवं अन्य प्रस्तावित खरीददारियों के सम्बन्ध में अधिकृत डीलर/ विक्रेताओं के कोटेशन ।

5- प्रस्तावित भवन एवं अन्य निर्माण कार्य के ऐस्टीमेट तथा स्थानीय निकाय से संस्था स्थापित करने एवं भवन निर्माण की अनुमति ।

6- समिति अथवा ट्रस्ट के पंजीकरण प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति । संस्था के संविधान के अन्तर्गत उक्त ऋण प्राप्त करने हेतु नामांकित अधिकारियों हेतु पारित प्रस्ताव की सत्यापित प्रति ।

7- केन्द्र/ राज्य सरकार/ बोर्ड/ विश्वविद्यालय अथवा अन्य सक्षम विभाग/ संस्था द्वारा मान्यता/ एफीलेशन के सम्बन्ध में पत्र की सत्यापित प्रति ।

8- संस्थान स्थल के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने हेतु सक्षम अधिकारी से प्राप्त स्वीकृति की प्रमाणित प्रति ।

9- संस्था के पदाधिकारियों एवं/अथवा मुख्य कार्यकारी को शैक्षणिक संस्था के संचालन के सम्बन्ध में अनुभव प्रमाण पत्र ।

10- अकृषि उद्येश्यों हेतु प्रार्थियों एवं जमानतदारों से पूर्व निर्धारित प्रपत्रों में शपथ पत्र प्राप्त किये जाये।

11- अकृषि उद्देश्यों हेतु पूर्व निर्धारित समस्त अन्य पत्रादि/ अभिलेख

 

राज्य की किसी भी प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा अपने कार्यक्षैत्र में शिक्षण संस्थान (तकनीकी या अन्य) की स्थापना या विकास के लिए नाबार्ड की स्ववित्त पुर्नभरण योजना के अन्तर्गत ऋण दिया जा सकता है । इस प्रकार के ऋण स्वीकृति में निम्न प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए --

 

1- ऋण आवेदन

जब भी किसी शिक्षण संस्थान का ऋण आवेदन पत्र प्राप्त हो, यह सुनिश्चित कर लिया जाना चाहिए कि उसमें सभी वांछित सूचनाऐं व वांछित प्रपत्र संलग्न है मुख्य रूप से उद्यमी के निवास का प्रमाण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जिसमें प्रर्वतक का परिचय, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, संस्थान का स्कोप, संस्थान के लिए स्टाफ की उपलब्धता, योजना की आर्थिक सक्षमता व सिक्यूरिटी आदि का विस्तृत उल्लेख हो। शिक्षण संस्थान की अनुमति, एफीलिएशन, यदि निर्माण प्रस्तावित है तो भूमि के टाइटल पत्र,निर्माण की स्वीकृति, नक्शा, निर्माण लागत अनुमान व सिक्यूरिटी में दी जाने वाली सम्पति के पत्रादि संलग्न है या नहीं। अपूर्ण प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किये जाने चाहिए। समिति या ट्रस्ट के मामले में यह सुनिश्चित किया जाये कि उक्त संस्था नियमानुसार पंजीकृत है तथा संस्था द्वारा प्रस्तावित ऋण की कार्यवाही हेतु पदाधिकारियों के संस्था के संविधान के अनुसार अधिकृत किया गया हो । ऋण लेने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त किया जावे ।

 

2- परियोजना का एप्रेजल --

परियोजना रिपोर्ट में अंकित सभी तथ्यों की विस्तृत जॉंच अति आवश्यक हैं। संबंधित अधिकारी तथा अकृषि ऋणों के एप्रेजल हेतु गठित कमेटी परियोजना स्थल का विजिट कर विभिन्न स्त्रोतों से खोजबीन व पूछताछ कर उद्यमी की साख, आर्थिक क्षमता, प्रर्वतकों की योग्यता, शैक्षणिक संस्थान का स्कोप, विभिन्न मदो पर सम्भावित व्ययों के अनुमानों की जॉंच, ऑंकी गई आय अनुमानों की जॉंच, बचत अनुमानों की जॉंच आदि सभी बिन्दुओं को शामिल कर विस्तृत एप्रेजल रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए अप्रेजल में आर्थिक विश्लेषण जैसे कैशफ्‌लो, प्रोफिटेविलिटी, कार्यशील पूजी, डी-एस-सी-आर- एवं ब्रेक इविन बिन्दु का विश्लेषण किया जाय। प्रार्थियों/समिति/ट्रस्ट की क्षेत्र में तथा बैंकों में साख की जानकारी प्राप्त की जावें । संस्थान हेतु आवश्यक प्रयोगशाला उपकरण, पुस्तकालय की व्यवस्था, फर्नीचर आदि सभी बिन्दुओं का अध्ययन कर सुनिश्चित किया जावे कि उनकी व्यवस्था सम्भव होगी । प्रस्तावित संस्थान में सम्भावित छात्रों का क्षेत्र के अनुसार ऑकलन किया जाये जिससे संस्थान की आर्थिक रुप से व्यवहार्यता के बारें में जानकारी मिल सकें।

 

3- प्रत्याभूति--

सिक्यूरिटी में यदि कृषि या आवासीय भूमि प्रस्तावित है तो उनके टाइटल की जॉंच प्राथमिक बैंक द्वारा अपने विधि सलाहकार से करायी जानी चाहिये तथा भार मुक्ति प्रमाण पत्र तहसील से प्राप्त किया जावें । निर्माण लागत की जॉंच राजकीय मान्यता प्राप्त वेल्यूअर अथवा राजकीय सेवारत इंजीनियर से कराई जानी चाहिए । सभी प्रकार की जॉंच रिपोर्ट्‌स एप्रेजल के साथ संलग्न की जानी चाहिए एन-एस-सी, किसान विकास पत्र, प्राथमिक बैंक में सावधिजमा को प्रार्थी के आवेदन के आधार पर बैंक के पक्ष में नामांकित कराया जाकर बैंक में मूल पत्रादि सुरक्षित रखे जावें

 

4- कार्यशील पूंजी का निर्धारण -

- शैक्षणिक संस्था की स्थापना प्रक्रिया एवं उसके संचालन के मध्य कुछ समय लग सकता है तथा संचालन प्रारम्भ होने के उपरान्त भी संस्था को चलाने हेतु कुछ समय के लिये आर्थिक स्त्रोतों की आवश्यकता हो सकती है । अत: संस्था की आवश्यकता के अनुसार अधिकतम 3 माह के परिचालन व्यय हेतु कार्यशील पूंजी स्वीकृत की जा सकती है ।

 

5- परियोजना की स्वीकृति--

1- प्राथमिक बैंक की शाखा में प्राप्त ऋण प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर नियमानुसार उसकी जॉच की जायेगी तथा यदि कोई अन्य पत्रादि/ अभिलेख की आवश्यकता हो तो प्रार्थियों को लिखित में सूचित किया जावे।

2- प्रत्येक प्रार्थना पत्र का इन्द्राज निर्धारित रजिस्टर में प्राप्ति क्रम के अनुसार किया जायेगा ।

3- शाखा के अधिकारी समस्त अभिलेखों एवं मौके की जॉच उपरान्त अकृषि उद्येश्यों हेतु पूर्व निर्धारित प्रपत्रों में अपनी रिपार्ट प्रस्तुत करेंगे ।

4- शाखा सचिव पत्रावली पर अपनी रिपोर्ट अंकित कर प्रधान कार्यालय को प्रेषित करेंगे।

5- प्रत्येक केस में प्राथमिक बैंक के विधि सलाहकार से प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि, भवन एवं समिति/ ट्रस्ट के केस में उनके नियमानुसार पंजीयन एवं ऋण लेने सम्बन्धित पात्रता के सम्बन्ध में राय अनिवार्य रूप में प्राप्त की जायेगी ।

6- प्राथमिक बैंक स्तर पर अकृषि उद्येश्यों हेतु गठित एप्रेजल कमेटी द्वारा परियोजना का एप्रेजल कर अग्रिम कार्यवाही की जायेगी ।

7- पन्द्रह लाख रुपये प्रति इकाई से अधिक का ऋण वितरण वें ही प्राथमिक बैंक कर सकते है जिनके द्वारा गत 30 जून को अकृषि ऋणों की न्यूनतम 75 प्रतिशत वसूली कर ली गई हों ।

8- शीर्ष बैंक के परिपत्र क्रमांक 293 दिनांक 19-12-2002 द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 7-50 लाख रुपये से अधिक की ऋण पत्रावली सचिव प्राथमिक बैंक शीर्ष बैंक के पत्र क्रमांक : अकृषि/4047-89 दिनांक 18-5-2001 द्वारा जारी निर्देशों के अनुरुप रिपोर्ट सलंग्न करते हुए प्राथमिक बैंक के संचालक मण्डल/ प्रशासक द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रति के साथ शीर्ष बैंक को पठाई जावें ।

9- ऋण स्वीकृति के उपरान्त ऋण स्वीकृति पत्र जारी किया जावेगा जिसमें ऋण की समस्त शर्तो का अनिवार्य रुप से उल्लेख हों प्रार्थियों से ऋण स्वीकृति की शर्तो को स्वीकार करने सम्बन्धित पत्र प्राप्त किया जावे।

10- शीर्ष बैंक के पत्र क्र्मांक 6339-435 दिनाक 25/5/10 के अनुसार 20.00 लाख तक के शिक्षा संस्थान प्राथमिक बैंक स्तर पर स्वीक्र्त किये जाते है ।

 

6- ऋण उपयोगिता प्रमाण पत्र-

- प्रत्येक किश्त के वितरण के उपरान्त मद वार ऋण उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त किया जावे तथा अन्तिम किश्त के वितरण के पश्चात्‌ पूर्ण ऋण उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर पत्रावली में संलग्न किया जावे।

 

7- डाक्यूमेन्ट्‌स का निष्पादन--

1- अकृषि उद्येश्यों हेतु जारी निर्देशों के अनुरुप प्रत्याभूति स्वरुप प्रस्तुत भूमि, भवन आदि के मूल पत्रादि प्राप्त किये जाये ।

2- रहन पत्र निष्पादित करा कर सम्बन्धित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में बैंक का रजिस्टर्ड भार दर्ज कराया जावें ।

3- आवश्यकतानुसार जमानतदारों से शपथ पत्र प्राप्त किये जावें ।

4- अधिकृत मशीनरी/ इक्यूपमेन्ट/ पुस्तक विक्रेता आदि से भुगतान करने हेतु सहमति एवं अधिकार पत्र प्राप्त किये जावें तथा उनसे से रेवेन्यू स्टाम्प्‌ड रसीद प्राप्त की जावें ।

5- ऋण की समस्त किश्तों के अग्रिम चैक प्राप्त किये जावें ।

6- बैंक के ऋण से स्थापित इकाई का बैंक के पक्ष में हाईपोथिकेशन कराया जावे।

7- योजना में वर्णित समस्त पत्रादि/ अभिलेखों की सत्यापित प्रतियॉ प्राप्त की जावे। ऋण इकरारनामा एवं आवश्यकतानुसार डिमान्ड प्रोमिजरी नोट प्राप्त किया जावे।

 

8- बीमा-

बैंक ऋण से स्थापित इकाई का कम्प्रीहेन्सिव बीमा करवाया जावे तथा इसकी सत्यापित प्रति पत्रावली में संलग्न किया जावे। बीमें का प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराया जावें तथा यदि ऋणी द्वारा नवीनीकरण नहीं कराया जावें तो बैंक द्वारा स्वयं नवीनीकरण कराकर प्रीमियम की राशि ऋण खातें में ऋणी के नाम डेबिट कर दी जावें। इस सम्बन्ध में ऋण वितरण से पूर्व प्रार्थियों से सहमति प्राप्त की जावें । बीमा पॉलिसी में बैंक का नाम वित्तदाता की हैसियत से दर्ज कराया जावें तथा उसे बैंक के नाम डिस्चार्ज कराया जावें ।

 

name
name
Design & Developed by Information & Computer Section @2014 R.S.L.D.B. Ltd
name