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सूचना

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों द्वारा वर्तमान में किसानों एवं लघु उद्यमियों को 12.50 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध करवाये जा रहे हैं।

   
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विविधिकृत ऋण योजनाएं..

 

1- डेयरी..

कृषक को जीवन स्तर में सुधार के लिए कृषि आय के साथ साथ उनके फार्म से सह आय प्राप्त करने हेतु डेयरी उद्येश्य हेतु ऋण सुविधा 5 से 6 वर्ष की अवधि के लिये उपलब्ध

 

2- पौल्टी..

कृषक को जीवन स्तर में सुधार के लिए कृषि आय के साथ साथ उनके फार्म से सहआय प्राप्त करने हेतु पोल्टी उद्येश्य हेतु ऋण सुविधा 5-7 वर्ष की अवधि के लिये उपलब्ध

 

3- मछलीपालन..

कृषक को जीवन स्तर में सुधार के लिए कृषि आय के साथ साथ उनके फार्म से सह आय प्राप्त करने हेतु मछली पालन उद्येश्य हेतु ऋण सुविधा 7 वर्ष की अवधि एक वर्ष अनुग्रह अवधिके लिये उपलब्ध

 

4- सूअर पालन-

- कृषक को जीवन स्तर में सुधार के लिए कृषि आय के साथ साथ उनके फार्म से सह आय प्राप्त करने हेतु सूअर पालन उद्येश्य हेतु ऋण सुविधा 5 वर्ष की अवधि एक वर्ष अनुग्रह अवधि के लिये उपलब्ध

 

5- भेड़ बकरी पालन-

- कृषक को जीवन स्तर में सुधार के लिए कृषि आय के साथ साथ उनके फार्म से सहआय प्राप्त करने हेतु भेड बकरी पालन उद्येश्य हेतु ऋण सुविधा 5 वर्ष की अवधि एक वर्ष अनुग्रह अवधि के लिये उपलब्ध

 

6- उद्यानिकी योजनाएं..

निरन्तर घटती जोत से प्रति इकाई क्षेत्र में अधिकतम आय अर्जित करने हेतु विभिन्न उद्यानिकी योजनाओं हेतु ऋण उपलब्ध, ऋण हेतु कृषकों के पास सिंचाई की सुनिश्चित व्यवस्था आवश्यक। यो

जनान्तर्गत विभिन्न फलों व फूलों के बाग लगाने हेतु ऋण 3 से 10 वर्ष 3-7 वर्ष की अनुग्रह अवधि। हेत ऋण सुविधा

 

7- भारवाहक पशु एवं पशु चालित गाड़ियॉ-

फसल कटाई के उपरांत आगामी फसल तक के खाली समय में एवं घर के बेरोजगार नवयुवकों को कार्य में लगाते हुए आय प्राप्त करने के लिए भार वाहक पशु एवं पशु चालित गाड़ियों हेतु बैंक द्वारा ऋण सुविधा 5 वर्ष हेतु उपलब्ध ।

 

8- कच्चा हौज सिंचाई योजना..

विद्युत आपूर्ति में कमी से निजात- जल स्रोत का विवेकपूर्ण एवं सामयिक उपयोग की दृष्टि से पानी का हौज निर्माण करवाने हेतु ऋण उपलब्ध, ऋणं की अवधि 9 वर्षं, जिसमें एक वर्ष का ग्रेस पीरीयड शामिल। अनुग्रह अवध लिए देय।

 

9- पक्का फार्म पौण्ड निर्माण योजना..

विद्युत आपूर्ति में कमी से निजात- जल स्रोत का विवेकपूर्ण एवं सामयिक उपयोग की दृष्टि से पानी का हौज निर्माण करवाने हेतु ऋण उपलब्ध, ऋणं की अवधि 9 वर्षं, जिसमें एक वर्ष का ग्रेस पीरीयड शामिल।

 

10- भूमि सुधार योजना..

कृषक को अपने फार्म को खेती योग्य बनाने के लिए भूमि समतलीकरण, तारबन्दी, पक्की दीवार, क्षारीयता का उपचार, आदि के लिए ऋण उपलब्ध, मशीनरी ऋण हेतु स्वीकृत राशि का भुगतान लाभार्थी के अधिकार पत्र पर सीधे बैक द्वारा फर्म को देय, ऋण का चुकारा 9 वर्षों में वर्षिक किश्तों में जिसमें अनुग्रह अवधि शामिल।

 

11- वर्मी कम्पोस्ट-

- कृषि अवशेष/वानस्पतिक कचरे, गोबर मिट्‌टी एंव किसान मित्र केंचुए का उपयोग करते हुये वर्मी कम्पोस्ट के निमार्ण हेतु ऋण उपलब्ध, ऋण का चुकारा 5 वर्षो में अनुग्रह अवधि 1 वर्ष वार्षिक किश्तों में।

 

12- रेशम कीट पालन..

रेशम कीट पालन करके रेशम कोकून तैयार करने हेतु ऋण वितरण का प्रावधान, ऋण का चुकारा 5 वर्षों में वार्षिक किश्तों में, जिसमें अनुग्रह अवधि शामिल।

 

13- मधुमक्खी पालन-

- पुष्पीय/उद्यानिकी फसलों की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन हेतु ऋण उपलब्ध, मधुमक्खी पालन द्वारा शहद/मोम /अतिरिक्त कॉलोनी के साथ फसलोत्पादन में वृद्धि, न्यूनतम 10 मधुमक्खी बक्सों हेतु ऋण का प्रावधान, अधिकतम रूपये बीस लाख तक ऋण, ऋणों का चुकारा 5 वर्ष में वार्षिक किश्तों के आधार पर जिसमें अनुग्रह अवधि शामिल।

 

14- हरा चारा उत्पादन..

सिंचाई की सुनिश्चितता होने पर रिजका की खेती हेुत ऋण सुविधा- स्वयं के पशुओं/हरे चारे के बैचान हेतु रिजका की खेती हेतु रूपये 10000/- प्रति एकड़ की दर से ऋण उपलब्ध.. ऋण की अवधि तीन वर्ष। -

 

15- कृषि स्नातकों द्वारा कृषि क्लिनिक/कृषि उद्योग केन्द्र की स्थापना

कृषि स्नातको को अपने स्वंय के कृषि क्लिनिक एवं कृषि उद्योग खोलने के लिये ऋण सुविधा उपलब्ध, कृषि स्नातकों को गतिविधि विशेष का समुचित अनुभव आवश्यक- ऋण का चुकारा गतिविधि विशेष से होने वाली आय के अनुसार- कृषि स्नातक के स्वयं के नाम से कृषि भूमि/अचल सम्पति नहीं होने पर पिता/माता/नजदीकि रिस्तेदार की कृषि भूमि/अचल सम्पति पर भी ऋण 5 वर्ष के लिए उपलब्ध-

 

16- ग्रामीण गोदाम निर्माण/परिवर्तन/विस्तारण योजना..

ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज/कृषि उत्पाद को खराब होने से बचाने एवं उसके समुचित रख रखाव व भण्डारण हेतु योजनान्तर्गत बैंक एन्डेड पद्धति से किश्तों में ऋण एवं अनुदान निम्नानुसार उपलब्ध है:-

-सं- विवरण सामान्य/अन्य श्रैणी के कृषक अनु-जाति /जनजाति के कृषक

1- लाभार्थी का योगदान 25: 20

2- अनुदान 25: 33.33

3- बैंक ऋण 50: 46.67

गोदाम निर्माण कार्य 15 माह में पूर्ण होना आवश्यक। गोदाम निर्माण नगरपालिका क्षैत्र के बाहर किया जायेगा। अधिकतम 10,000 मै-टन तक ऋण सुविधा 11 वर्ष अनुग्रह अवधि 1 वर्ष हेतु उपलब्ध।

 

17- औषधीय पादप योजना..

राज्य के उपलब्ध प्राकृतिक सम्पदा को ध्यान में रखते हुये दीर्घकालीन औषधीय पादपों जैसे सफेद मूसली, गवार पाठा, गूग्गल आदि की खेती हेतु ऋण सुविधा 3 से 5 वर्ष।

 

18- जैटोफा प्लान्टेशन योजना..

जैटोफा अर्थात रतनजोत एक बहुत ही बहुमूल्य पौधा है। इसके विभिन्न भाग सौन्दर्य प्रसाधन, रंगाई, मोमबत्ती, साबुन व प्लास्टिक निर्माण के काम आते है। प्रमुख रूप से इसके बीजों से तेल निकाला जाता है जो कि डीजल के विकल्प के रूप में काम में आता है। इसके बायोडीजल भी कहते है। इसके लिये एक हेक्टर की इकाई हेतु रूपये 10500/- से 16200/- तक का ऋण 7 वर्ष की अवधि 3 वर्ष की अनुग्रह अवधि सहित के लिये दिया जाता है।

 

19- मिट्‌टी/पानी जॉच लैब स्थापना..

कृषको की फसलोत्पादन बढ़ाने हेतु मिट्‌टी/पानी की जॉच के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने के लिये लैब की स्थापना हेतु ऋण सुविधा का प्रावधान, अधिकतम 5 लाख तक की ऋण सुविधा 8 वर्ष के लिये उपलब्ध।

 

20- वेन्चर कैपिटल फन्ड योजना..

राज्य में डेयरी/पोल्टी उेश्य की चयनित गतिविधियों हेतु नाबार्ड द्वारा विशेष योजना प्रारम्भ की गई है। जिसकी मुख्य विशेषताये निम्न है:- निवेश की 50 प्रतिशत राशि पर ब्याज दर शून्य रहेगी नियमित भुगतान होने पर शेष राशि पर देय ब्याज की 50 प्रतिशत राशि कृषक को लौटा दी जावेगी। प्रभावी ब्याज दर 3-4 प्रतिशत वार्षिक होगी। ऋण की अवधि 3 से 8 वर्ष होगी।

 

21- कृषि प्रयोजनों हेतु कृषि भूमि खरीदने हेतु ऋण सुविधा..

कृषकों के कार्य कलापों के विस्तार एवं छोटी और सीमान्त जोतों को आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने हेतु कृषि भूमि क्रय करने के लिए ऋण सुविधा, यह सुविधा ऐसे लधु और सीमान्त कृषक के लिए है जिनके पास इस योजना में खरीदे जाने वाली कृषि भूमि को मिलाकर कुल कृषि भूमि अधिकतम 5 एकड़ असीचिंत भूमि या ढाई एकड़ सीचिंत भूमि है, कृषक को क्रय की जारही भूमि की लागत का 20 प्रतिशत मूल्य स्वंय द्वारा वहन करना होगा।

 

22- कृषि विपणन आधारिक सरंचना, श्रेणीकरण और मानकीकरण के विकास/सदृढ़ीकरण के लिए योजना
फसल कटाई के बाद विभिन्न कृषि उत्पादों/विपण्य अधिशेष के प्रबन्धन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए विपणन आधारिक सरंचना के विकास हेतु यह योजना तैयार की गई है। यह योजना सुधार से संबंधित है और आधारिक सरंचना परियोजनाओं के विकास के लिए सहायता उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को दी जाएगी जो प्रत्यक्ष विपणन एवं संविदा कृषि की अनुमति और निजी तथा सहकारी क्षेत्रों में कृषि मण्डियों की स्थापना की अनुमति देते है।

 

23- केन्द्र प्रायोजित भेड एवं बकरी पालन योजना:-

भेड़ एवं बकरियों का पालन अत्यधिक गरीब ग्रामीणों द्वारा किया जाता है और ये पशु हमारे समाज को मांस, न और खाद प्रदान करते है, ये पशु विभिन्न प्रकार की कृषि जलवायु स्थितियों के अनुकूल होते है, तथापि उस क्षेत्र के पिछड़े होने के मुख्य कारणों में अत्यन्त निर्धन लोगों को इस क्षेत्र की भूमिका की कम जानकारी, योजनाकारों/ वित्तीय एजेन्सियों के द्वारा ध्यान के अभाव और पशुओं की उत्पादकता सुधारने की दिशा में कम ध्यान दिया जाना शामिल है।

इस पृष्ठभूमि में, भारत सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि 11-वीं पंचवर्षीय योजना की शेष अवधि के दौरान छोटे रोमन्थक भेड एवं बकरी के समन्वित विकास हेतु जोखिम पूॅजी निधिष् के साथ एक योजना शुरु की जाए। इस योजना के दिशा-निर्देशों के पैरा 5-1 में यथा उल्लिखित विभिन्न घटकों के लिए कुल वित्तीय परिव्यय टीएफओ पर आधारित ब्याज मुक्त ऋण आईएफएल प्रदान किया जाएगा।

 

 

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